अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने थाना पालीमुकीमपुर के भवन निर्माण के मामले में निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर निगरानी याचिका को खारिज कर दिया है। निचली अदालत ने पूर्व में थाने के भवन को कब्जा मानते हुए हटाने का निर्देश दिया था।
पत्रावली के अनुसार गांव पालीमुकीमपुर में 1994 में थाने के भवन का निर्माण किया गया था। गांव के जय नारायण आदि ने इस जमीन को अपनी बताते हुए निर्माण को अवैध बताया और सिविल कोर्ट में वाद दायर कर दिया। इसमें डीएम, एसएसपी, सीओ, थानाध्यक्ष को पार्टी बनाया।
इस वाद में सिविल कोर्ट ने अभिमत दिया कि गाटा संख्या 621/3 दो भागों में विभाजित है, उसके उत्तरीभाग पर कब्जा करके नवीन थाना पाली मुकीमपुर के भवन का निर्माण किया गया, जिसका स्वामित्व डिक्रीदरान का है। कोर्ट ने कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे।
इसके विरुद्ध यूपी सरकार की ओर से जिला जज के यहां अपील की गई। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक में हुई। न्यायाधीश प्रतिभा सक्सेना ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के बाद याचिका को बलहीन और निचली अदालत के आदेश को सही माना है। उन्होंने सिविल निगरानी को निरस्त कर दिया है और निष्पादन न्यायालय का मूल अभिलेख, निर्णय की प्रति के साथ निष्पादन न्यायालय को वापस कर दिया है।साथ ही पक्षकार को निष्पादन न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा है।