शाहजहांपुर। सप्तम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार सिद्धू ने बच्ची की गैरइरादतन हत्या के मुकदमे में एक दोषी को दस वर्ष के कारावास और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इसी मुकदमे में एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। एक आरोपी की मृत्यु मुकदमे के दौरान हो गई थी। निगोही थाना क्षेत्र के गांव जिंदपुरा निवासी अमरपाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 20 अप्रैल 2004 को उनका बेटा रंजीत नल से पानी भरने गया था, तभी वहां पर आए साधु ने उसकी बाल्टी में थूक दिया। इसी बात पर दोनों में गाली गलौज हो गई थी।
थोड़ी देर बाद सियाराम, प्रेमपाल और साधु अपने हाथों में लाठी-कांता लेकर आए और अमरपाल को गालियां देने लगे। विरोध पर हमलावरों ने अमरपाल को पीटना शुरू कर दिया। शोर सुनकर अमरपाल की पत्नी राजबेटी अपनी एक साल की बेटी कुसुम को गोद में लेकर उसे बचाने का प्रयास करने लगी। इस दौरान कांता बच्ची के सिर पर लग गया। उसकी मौत हो गई।
विवेचना के बाद सियाराम, प्रेम पाल और साधु के खिलाफ आरोप पत्र अदालत भेजा गया। गवाहों के बयान और सरकारी वकील भावशील शुक्ला के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने सियाराम को दोषी पाते हुए उसे दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। सियाराम के बेटे साधु को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। प्रेमपाल की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी।