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दस दिन नहीं आई थी नींद..अब मिला दिल को सुकून

Thu, 25 Mar 2021 12:37 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
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एसएसपी मुनिराज - फोटो : अमर उजाला
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पुलिस सेवा के अब तक के जीवन में बुधवार को दिल को बड़ी तसल्ली मिली है। इस खुशी की वजह भी जायज है। बुलंदशहर में किशोरी के अपहरण के बाद दुष्कर्म और हत्या के जिस केस को लेकर बेहद तनाव रहा। दस दिन तक नींद नहीं आई। उस केस में तीनों आरोपियों को तीन साल बाद न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई है।

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हालांकि बेटी तो अब इस दुनिया में नहीं है। मगर लगा है कि बेटी को किसी हद तक न्याय दिला पाने में सफल रहा। मन को सुकून महसूस हो रहा है। बेटी के परिवार ने भी फोन कर आभार जताया है। हालांकि उनको उनकी बेटी तो वापस नहीं दिला सकता। मगर उनके खुशी में अपनी खुशी महसूस हो रही है। यह कहना है बुलंदशहर फांसी फैसले पर एसएसपी मुनिराज जी का।

अमर उजाला से बातचीत में वे बताते हैं कि वर्ष 2018 में जब वह बतौर बुलंदशहर एसएसपी तैनात थे, तब 2 जनवरी की शाम को छात्रा साइकिल से कोचिंग में न्यू ईयर पार्टी में से लौट रही थी। तभी उसे पुराने जीटी रोड से अगवा किया गया। मौके पर साइकिल पड़ी मिली थी, जिसके आधार पर यह पता चला कि छात्रा अगवा हुई है।
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इसके अलावा कोई सुराग नहीं था। इसी बीच 4 जनवरी को जब नोएडा में उसकी नाले में लाश मिली और पोस्टमार्टम में दुष्कर्म की पुष्टि हुई तो तनाव और ज्यादा बढ़ गया। सामाजिक और सियासी स्तर पर पुलिस पर तमाम तरह के दबाव थे।

वे बताते हैं कि इस घटना को चुनौती के रूप में स्वीकारते हुए 4 जनवरी की सुबह से ही अपना दफ्तर और आवास छोड़कर बुलंदशहर क्राइम ब्रांच का दफ्तर ठिकाना बनाया। वहीं बैठकर कोतवाली देहात के इंस्पेक्टर धनंजय मिश्रा, एसओजी, सर्विलांस टीम व अन्य अधीन अधिकारियों संग घटना के खुलासे पर मंथन शुरू हुआ। इसी बीच एक सुराग मिला कि अल्टो सवार उसे ले गए हैं। जांच में छात्रा के कुछ सहपाठी दोस्तों में से किसी एक पर अल्टो होने के कारण उन पर संदेह गहराया। मगर वे निर्दोष पाए गए।

सीबीआई की तर्ज पर किया गया काम
इसके बाद सीबीआई की तर्ज पर घटना के एक घंटे पहले से लेकर घटना के एक घंटे बाद तक जीटी रोड पर इधर-उधर गुजरने वाली अल्टो कारों का ब्योरा जुटाया। इस दौरान एक हरियाणा नंबर की कार प्रकाश में आई। उसकी लोकेशन तक घटनास्थल आते और वापस लौटकर नोएडा की ओर जाते पाई गई। वह गाड़ी लाश मिलने के स्थान पर भी ट्रैस हुई।

इस पर उस कार स्वामी के फरीदाबाद पते पर टीम भेजी तो पाया कि उसने कार सिकंदराबाद के किसी व्यक्ति को बेच दी है। फिर टीम उसके घर पहुंची तो पाया कि उसका छोटा भाई घटना वाले दिन अपने दो दोस्तों संग कार में था। इस पर एक एक्सीडेंट के संबंध में पूछताछ के बहाने कार स्वामी के भाई व एक अन्य को हिरासत में लिया गया। तीसरा पुलिस के पहुंचने पर भाग गया। बस तब जाकर घटना खुली। वहीं पुलिस दबाव के चलते तीसरा आरोपी थाने पहुंचकर हाजिर हो गया था।

गाड़ी में बाल और चप्पलें बने अहम सुराग
कहते हैं कि हर वारदात में अपराधी कोई न कोई सुराग छोड़ देता है। इस घटना में भी ऐसा ही हुआ। जब फॉरेंसिक टीम ने गाड़ी की जांच की तो कार में किशोरी के बाल व चप्पलें बरामद हो गईं। उन्हें आरोपी फेंकना भूल गए। फॉरेंसिक जांच में किशोरी के बालों का डीएनए मिलान उसकी मां के डीएनए से हो गया। बस वही इस घटना में सजा कराने तक अहम सुराग बना है।

बुलंदशहर से आए बधाई के तमाम फोन
इस घटना के आरोपियों को फांसी पर बुलंदशहर से बेटी के परिवार के साथ-साथ कई परिचितों के बधाई के लिए फोन आए। एसएसपी बताते हैं कि बेशक बुलंदशहर से तबादला हो गया। मगर इस वारदात में आरोपियों को सजा कराने की दिशा में वे बराबर बुलंदशहर पुलिस के अधिकारियों, बेटी के परिवार और न्यायालय में मॉनीटरिंग सेल के संपर्क में रहे। आज उनकी मेहनत सफल हुई है। बेटी के परिवार ने बुधवार शाम को ही अलीगढ़ आकर मिलने के लिए समय मांगा है।
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घटनाक्रम एक नजर में
2 जनवरी 2018 की शाम कार सवार अगवा कर ले गए
4 जनवरी 2018 को नोएडा क्षेत्र में नाले में लाश मिली थी
9 जनवरी 2018 को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था
ढाई महीने बाद मुकदमे में तीनों पर चार्जशीट दायर की गई
तीन साल बाद आरोपियों को फांसी मिलने की खबर मिली

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