Prof. Irfan Habib
प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि टीपू सुल्तान को किताब से हटा सकते हैं, पर इतिहास से नहीं। दरअसल, उन्होंने यह टिप्पणी कर्नाटक सरकार की ओर से टीपू सुल्तान को बोर्ड के पाठ्यक्रम से हटाने के प्रस्ताव का समर्थन करने पर दी है। वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने टीपू सुल्तान की जयंती मनाने की शुरुआत की थी। टीपू की जयंती 20 नवंबर को है।
डॉ. इरफान ने कहा कि जनसंघ व भाजपा टीपू सुल्तान का सम्मान नहीं करते हैं, उनका सांप्रदायिक नजरिया है। कहा, जितने भी इतिहासकार हैं, सभी टीपू सुल्तान को अंग्रेजी हुकूमत का विरोधी बता चुके हैं। अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए टीपू मारे गए हैं। कोई राजा-महाराजा रहा जो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ता हुआ मारा गया है। इतिहासकार ने कहा कि टीपू सुल्तान की सेना में हिंदू-मुस्लिम थे।
उन्होंने कहा कि टीपू को किताब से हटा सकते हैं, लेकिन उससे इतिहास नहीं बदला जा सकता। टीपू को हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखना नहीं चाहिए। बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में टीपू सुल्तान ब्लॉक भी है।