जब पढ़ने का जज्बा हो और पढ़ाने वाले भी मिल जाएं, तो यकीनन मंजिल की तरफ बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। जी हां, कुछ ऐसा ही राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में है, जहां संस्कृत विषय पढ़ने वाली सिर्फ एक छात्रा है। शिक्षा अधिकारियों की दरियादिली देखिए दूसरा विषय लेने की बजाए, छात्रा को संस्कृत ही पढ़ाया जा रहा है। इससे एक उम्मीद का दीया भी जला है कि संस्कृत को आने वाले दिनों में वही मुकाम मिलेगा, जिसे सरकार भी दिलाने को प्रयासरत है।
बता दें कि शहर के जीजीआईसी की कक्षा 11 में पढ़ने वाली छात्रा भारती कुमारी ने अपना वैकल्पिक विषय संस्कृत भरा था। इसके अलावा एक और छात्रा ने पहले तो संस्कृत लेने की इच्छा जाहिर की, लेकिन बाद में उसने मना कर दिया। छात्राओं की संख्या न बढ़ने पर प्रधानाचार्या तथा संस्कृत की शिक्षिका दोनों गफलत में थीं कि आखिरकार अकेली छात्रा के लिए कैसे और क्या व्यवस्था की जाए।
लेकिन भारती ने अकेले ही पढ़ने की ठान रखी थी। इस कारण उसने अपने भाई के साथ डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा से मुलाकात की। डीआईओएस ने छात्रा की रुचि को देखते हुए प्रधानाचार्या को अकेले भारती के लिए ही संस्कृत की कक्षा चलाने के निर्देश दे दिए। अब भारती को संस्कृत की शिक्षिका ने पढ़ाना भी शुरू कर दिया है।
संस्कृत में कैरियर अच्छा है। भारती को संस्कृत पढ़ाना तो अच्छा लग रहा हैं, लेकिन वहीं अगर अन्य छात्राएं भी आगे आतीं तो और भी ज्यादा माहौल संस्कृत के लिए बनता।
- सुषमा रानी, संस्कृत प्रवक्ता
मुझे संस्कृत पढ़ना काफी अच्छा लगता है। मैने कक्षा नौ व दस में भी संस्कृत पढ़ी है। इसलिए मैने शिक्षकों से वैकल्पिक विषय संस्कृत ही रखने के लिए कहा है।
- भारती कुमारी, विशंभरनगर, जयगंज
संस्कृत अति प्राचीन भाषा है। इस भाषा से ही अधिकतर भाषाएं निकली हैं। वेद-पुराण आदि भी संस्कृत में मिलते हैं। इस कारण भारती के लिए अलग से कक्षा चलाने के निर्देश प्रधानाचार्य को दे दिए हैं।
- डॉ. धर्मेंद्र शर्मा, डीआईओएस अलीगढ़