शातिर साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश
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थाना बन्नादेवी पुलिस, क्रिमिनल इंटेलिजेंस नगर और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने नौकरी के नाम पर बेरोजगार लोगों के शैक्षिक व अन्य दस्तावेज हासिल कर उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाने वाले एक बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड समेत कुल 7 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में कूटरचित दस्तावेज, लैपटॉप, मोबाइल फोन और 2 लग्जरी कारें बरामद की गई हैं।
इस गेम का सरगना गाजियाबाद के थाना इंदिरापुरम में रामप्रस्था कॉलोनी ग्रीन वैली का रहने वाला दिव्यांश कुमार है। यह 7 साल संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में रहकर आया है। वहीं पर अपने संपर्कों से साइबर ठगी करवाता था और उसका पैसा खातों में आता था। इसका सहयोगी अलीगढ़ के थाना पारसी में ज्वालापुरी का रहने वाला मनोज कुमार अकाउंटेंट था और अलीगढ़ में इसका काम संभालता था।
गिरोह के अन्य सदस्यों में फर्रुखाबाद के कायमगंज का निवासी रितिक अनुराग और सुंदरम और गुजरात के भुज का रहने वाला नीरज शामिल है। इनके पास से लैपटॉप, सीपीयू, मोबाइल, फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, चेक बुक, फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, जीएसटी रजिस्ट्रेशन, स्टांप रेंट एग्रीमेंट, ड्राइविंग लाइसेंस, डायरी आदि बरामद हुए हैं। आरोपियों के पास से एक फोर्ड एंडेवर कर और वैगन आर कार अलीगढ़ नंबर की भी बरामद हुई है। एंडेवर कार हरियाणा के गुरुग्राम नंबर की है।
15 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध लेन-देन
एसपी सिटी आदित्य बंसल ने बताया कि जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेरोजगार युवाओं को नौकरी का लालच देकर उनके दस्तावेज ले लेता था और उनकी आड़ में कुल 97 फर्जी बैंक खाते खुलवा चुका था। इन खातों के माध्यम से अब तक करीब 15 करोड़ रुपये की संदिग्ध और अवैध रकम का लेन-देन किया जा चुका है। पुलिस ने इस संबंध में थाना बन्नादेवी में केस पंजीकृत कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।