प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना था कि विश्वविद्यालय की बेशकीमती जमीन को किसी भी स्थिति में सुरक्षित रखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से जमीन से जुड़े विवाद का समाधान कराने और विश्वविद्यालय के हितों की रक्षा करने की मांग की।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में भमौला स्थित यूनिवर्सिटी की जमीन को बचाने को लेकर नगर निगम मुर्दाबाद के नारे लगे। सड़क पर उतरकर शिक्षकों ने यूनिवर्सिटी का माहौल खराब करने का आरोप लगाया। एएमयू शिक्षक संघ (अमुटा) के बैनर तले शिक्षकों ने शताब्दी द्वार पर धरना देकर जमीन के संरक्षण की मांग उठाई।
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सोमवार दोपहर 12 बजे से स्टाफ क्लब से शिक्षकों का पैदल मार्च शमशाद मार्केट स्थित बेगम सुल्तान जहां हॉल तक के लिए निकला, लेकिन शताब्दी द्वार पर उन्हें प्रॉक्टोरियल टीम ने रोक लिया। शिक्षकों ने द्वार खुलवाने के लिए प्रॉक्टर पर दबाव बनाया। जब द्वार नहीं खोला गया, तब शिक्षकों ने वहीं पर धरना दे दिया। मार्च में नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी की। द्वार बंद कर दिया गया, जो दोपहर दो बजे तक बंद रहा। द्वार बंद होने से लोगों और विद्यार्थियों की आवाजाही बंद हो गई। शिक्षकों और प्रॉक्टोरियल टीम में नोकझोंक भी हुई। धरने में पूर्व छात्र भी शामिल रहे।
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अमुटा के अध्यक्ष प्रो. तुफैल अहमद ने कहा कि नगर निगम ने यूनिवर्सिटी की जमीन पर अपना बोर्ड लगाकर माहौल को खराब करने की कोशिश की है। सचिव डॉ. अशरफ मतीन ने कहा कि उन्हें आगे जाने से रोका गया, जबकि उन्होंने पहले से बेगम सुल्तान जहां हॉल तक जाने के लिए कह रखा था। पूर्व छात्र आगा यूनुस ने कहा कि यूनिवर्सिटी की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी, उसके खिलाफ मार्च निकला था। यूनिवर्सिटी की बेशकीमती जमीन को किसी भी स्थिति में सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इसके बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एडीएम सिटी किंशुक श्रीवास्तव को सौंपा गया।
धरने में शिक्षक-कर्मचारी, ड्यूटी पर कौन
एएमयू की जमीन बचाने को शिक्षक-कर्मचारी शताब्दी द्वार पर धरने में जुटे रहे। अब कैंपस में चर्चा है कि जब धरने में शिक्षक-कर्मचारी मौजूद थे, तो कक्षाओं में कौन पढ़ा रहा था, विभागों में ड्यूटी कौन निभा रहा था?