कहते हैं कि पुलिस कभी-कभी रस्सी का सांप बना देती है। ऐसा ही वाकया एक टैंपो स्वामी के संग घटित हुआ है। एक टैंपो किसी और के नाम से गांधीपार्क पुलिस ने सीज कर दिया। जब उसका असली मालिक टैंपो छुड़ाने के लिए पैरोकारी में लगा तो दरोगा ने उसके खिलाफ झूठी रिपोर्ट दे दी कि यह मालिक नहीं है। अब टैंपो मालिक ने न्यायालय की शरण ली तो उसके दस्तावेजों को देखते हुए न्यायालय ने तत्कालीन थानेदार व हैड मुंशी के खिलाफ एसएसपी को कार्रवाई का आदेश दिया है। 8 फरवरी तक कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट तलब की है।
टैंपो स्वामी नेम सिंह पुत्र हरपाल सिंह निवासी भगवान नगर सासनी गेट के अनुसार उसने 26 मई 2018 को नया टैंपो संख्या यूपी 81 सीटी 1611 खरीदा था। यह टैंपो थाने के तात्कालीन एसएसआई नरेंद्र कुमार ने किसी चिढ़न में 5 दिसंबर 2019 को एमवी एक्ट के तहत धारा 207 में सीज कर दिया। जिसमें टैंपो मालिक के रूप में काल्पनिक नाम आकाश निवासी याकूतपुर का नाम दर्ज कर दिया।
टैंपो छुड़ाने के लिए नेम सिंह ने न्यायालय में शरण ली तो 13 दिसंबर को यह रिपोर्ट भेज दी कि इसका मालिक आकाश है। साथ में अपनी गलती छिपाने के लिए हैड मुंशी रघुवीर सिंह की मदद से आकाश नाम से एक काल्पनिक व्यक्ति के नाम से न्यायालय में टैंपो छुड़वाने के लिए आवेदन करा दिया। चूंकि वह असल मालिक नहीं था, इसलिए दस्तावेज पेश नहीं कर सका। बाद में इंस्पेक्टर मणीकांत शर्मा से रिपोर्ट लगवाकर अपर नगर मजिस्ट्रेट के यहां से अनुमति लेकर टैंपो नीलाम कर दिया। इस पर असल टैंपो स्वामी नेम सिंह ने न्यायालय में शरण ली, जिसमें एसआई नरेंद्र को तलब किया गया।
मगर बार-बार बुलाने पर भी कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। इस पर मौजूदा इंस्पेक्टर हरिभान सिंह राठौर से रिपोर्ट तलब की गई। इंस्पेक्टर ने आरटीओ कार्यालय से ब्यौरा लेते हुए इस टैंपो के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट दी। जिसमें उल्लेख किया है कि एसएसआई नरेंद्र कुमार व हैड मुंशी रघुवीर सिंह ने तात्कालीन इंस्पेक्टर व आरटीओ कार्यालय को भ्रमित कर अंधेरे में रखकर यह कृत्य किया है।
असल मालिक नेम सिंह ही है। इंस्पेक्टर की इस रिपोर्ट पर अब एसीजेएम-5 ने इसे आपराधिक कृत्य मानते हुए एसएसपी को आदेश दिया है कि मामले में जांच कराई जाए। एसआई नरेंद्र व हैड मुंशी रघुवीर सिंह व जो अन्य सहयोगी इस जांच में दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई कर 8 फरवरी तक न्यायालय को अवगत कराया जाए।