यकीनन, जब इंसान के जिस्म में कोई कमी रहती है तो खुदा उस कमी के एवज उसे एक ऐसी ताकत देता है, जिससे खुद को दूसरों से बेहतर पाता है। जी हां, ऐसी ही कहानी है तबस्सुम की, जो न तो सुन सकती है और न ही बोल सकती। मगर, जब वह गीत के धुन पर नृत्य करती है तो तबस्सुम (मुस्कान) के जज्बे से प्रतिभा मुस्कराने लगती है।
महानगर के रजानगर निवासी खान मोहम्मद व शहाना की बेटी तबस्सुम (16) अपराजिता की तरह जिंदगी के फलसफे को समझकर उन लोगों के लिए मिसाल बन रही है, जो खुदा की नेअमत पाने के बाद भी खुद को कमजोर समझती हैं। तब्बसुम सासनीगेट स्थित प्रागनरायन मूक बधिर विद्यालय में कक्षा पांच में पढ़ती है।
मां शहाना ने बताया कि उन्हें खुद भी पता नहीं है कि बेटी कैसे गानों की धुनों पर डांस कर लेती है। प्रैक्टिस के बाद जब वह विद्यालय के कार्यक्रम में स्टेज पर नृत्य करती है तो उसके हर स्टेप धुनों पर ही होते हैं। बिटिया को डांस पसंद है। शहाना ने बताया कि जब तबस्सुम 11 महीने की थी, तब वह बीमार हो गई थी। किसी दवा के प्रतिकूल प्रभाव से उसकी तबियत और खराब हो गई। बाद में उसका सुनना और बोलना बंद हो गया।