कोरोना वायरस का संक्रमण फिर तेजी से बढ़ रहा है। इसके कारण बड़ी संख्या में लोग उपचार के अभाव में हैं। कोरोना के लक्षण वाले या कम लक्षण वाले व्यक्तियों को सरकारी गाइडलाइन के अनुसार होम आइसोलेट किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने होम आइसोलेशन में सही तरीके से दवाओं का सेवन कर कोरोना को हराने के लिए चिकित्सकीय सलाह जारी की है। स्वास्थ्य विभाग ने आग्रह किया है कि होम आइसोलेशन में प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सही तरीके से दवाएं लें।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भानु प्रताप सिंह ने कहा कि कोविड की पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर घबराएं नहीं। गाइड लाइन के तहत बताई गई दवाओं का सेवन करें। जल्द लाभ मिलेगा। जिन लोगों में कोविड के लक्षण हैं और रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं। वह दवाओं को सेवन कर सकते हैं। जिससे इलाज में देरी नहीं होगी।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम भास्कर ने बताया कि ऐसे मरीजों को एल-1 कोविड अस्पताल में रखा जाएगा। होम आइसोलेशन में मरीज का तापमान, श्वसन दर और ऑक्सीजन सैचुरेशन दिन में तीन बार जांचा जाएगा। होम आइसोलेशन वाले मरीजों के प्रारंभिक जांच के दसवें दिन या भर्ती होने के सातवें दिन डिस्चार्ज किया जाएगा। रोगी को उसके बाद घर में सात दिनों तक क्वारंटीन रहना होगा।
इस प्रकार करें दवाओं का सेवन
आइवरमेक्टिन की 12 एमजी की एक गोली रात में खाने के बाद रोज खानी हैं। एक बार में लगातार तीन दिन के लिए यह दवा लेनी है। एजिथ्रोमायसिन की 500 एमजी की एक गोली दिन में खाने के बाद एक बार में लगातार तीन दिन के लिए लेनी है।
डॉक्सी 100 एमजी की गोली दिन में दो बार 10 दिन के लिए लेनी है। क्रोसिन 650 एमजी दिन में 4 बार 3 दिन के लिए या शरीर दर्द, बुखार आने पर लें। लिम्सी 500 (एसकोर्बिक एसिड 500 एमजी) एमजी की दवा रोज एक 10 दिन के लिए खानी हैं। जिंकोनिया 50 एमजी की दवा रोज 10 दिन तक खानी हैं। कैलसिरोल हफ्ते में एक बार लेना है। इसका प्रयोग छह हफ्तों तक करें।
इस गाइडलाइन का करें प्रयोग
होम आइसोलेशन वाले मरीज दवाओं के नियमित सेवन के साथ दिन में 3-4 लीटर पानी पीयें। दिन में कम से कम 3 बार भाप लें। 8 घंटे सोयें। 45 मिनट तक व्यायाम करें। समय-समय पर ऑक्सीजन का स्तर चेक करते रहें। यदि ऑक्सीजन का स्तर 94 प्रतिशत से नीचे जाता है तो डॉक्टर से सलाह लें। होम आइसोलेट किए गए व्यक्ति व लक्षण युक्त व्यक्ति मास्क एवं सैनिटाइजर का उपयोग करें। अलग कक्ष में रहें तथा अलग शौचालय का प्रयोग करें। समय समय पर अपने ऑक्सीजन स्तर की जांच करते रहें।
- डॉ. शोएब अंसारी।