शहर में स्विमिंग पूल का बढ़ता चलन अब सवालों के घेरे में है। गर्मी से बचने के लिए पूल का सहारा ले रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर सुरक्षा मानकों की अनदेखी, गंदे पानी और अव्यवस्थित व्यवस्था इसे जोखिम भरा बना रही है। बच्चे जिस तरह ऊपर से पूल में डाइव कर रहे हैं, वह जोखिम भरा है, क्योंकि पूल की गहराई पांच फीट है, जबकि छलांग 10 फीट से लगा रहे हैं। पूल में औसत से ज्यादा लोगों की तादाद होने से जल भी प्रदूषित हो रहा है। इससे त्वचा संबंधी बीमारियां फैलने का खतरा है। शहर में स्कूल, अपार्टमेंट, रिसॉर्ट में एक दर्जन स्विमिंग पूल हैं, जबकि एएमयू में तीन स्विमिंग पूल हैं। इनमें एक पूल ओलंपिक मानक का है।
-शहर में 12 पूल
-एएमयू में 3 पूल
-पूल का खुलने समय अलग-अलग
-छोटे पूल सुबह 7 बजे से रात 12 बजे तक खुलते हैं
-दिन में 50 रुपये और रात में 100 रुपये का टिकट
-स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में जल्द शुरू होगा स्विमिंग पूल
ऐसे पूल का पानी होता है गंदा :
ज्यादा लोगों के नहाने से गंदा पानी हो जाता है। पानी में बैक्टीरिया से भर जाता है। पसीना, तेल, धूल और बॉडी केमिकल्स मिलकर क्लोरीन की ताकत कम कर देते हैं। इससे त्वचा में संक्रमण, आंखों में जलन, एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है।
पूल में इतना डालें क्लोरीन : सामान्य तौर पर: 1–3 पार्ट्स पर मिलियनक्लोरीन सही माना जाता है। ज्यादा इस्तेमाल वाले पूल में 3–5 पीपीएम तक रखा जा सकता है। पीएच का स्तर 7.2 – 7.6 के बीच होना चाहिए। बहुत कम क्लोरीन से पानी में कीटाणु बढ़ेंगे। बहुत ज्यादा क्लोरीन से आंखों में जलन, स्किन ड्राई और सांस की परेशानी होगी। पूल में रोजाना फिल्टर चलाएं। सप्ताह में 1–2 बार पानी की जांच करें।
ऐसे पानी कम होता है : धूप और गर्मी से वाष्पीकरण से पानी कम होता है। लोगों के नहाने से पूल का पानी बाहर निकलता है। पूरा पानी सिर्फ तब बदलें जब पानी बहुत गंदा या हरा हो जाए। बदबू आने लगे या केमिकल बैलेंस कंट्रोल में न आए।
तैराकी से बढ़ती फिटनेस : तैराकी एक बेहतरीन फुल-बॉडी एक्सरसाइज है। दिल और फेफड़ों के लिए अच्छा है। कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है।
ये भी हो सकता है नुकसान -
- त्वचा संक्रमण फंगल, आंखों में जलन
- सूखी त्वचा, बाल खराब, सांस में जलन
- बैक्टीरिया और वायरस का खतरा बढ़ता है
- पूल के आसपास चोट लग सकती है
स्विमिंग पूल का मानक -
इंटरनेशनल : 50 मीटर लंबा (ओलंपिक)
सेमी/स्कूल : 25 मीटर लंबा
चौड़ाई : आमतौर पर 10–25 मीटर
गहराई : डाइविंग के लिए 3 – 5 मीटर
जिला स्विमिंग एसोसिएशन का गठन तो है, लेकिन उसकी सक्रियता शून्य है। स्कूलों शिक्षण संस्थानों व विश्वविद्यालय में कहीं पर भी वर्तमान में न तो ट्रेंड स्विमिंग प्रशिक्षक हैं और ना ही लाइफ सेविंग गार्डन और न ही ट्रेड स्विमिंग के सफाई की जानकारी रखने वाले हैं। स्विमिंग पूल केवल कंक्रीट का एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह एक रोमांच करने वाला स्थल है।
- मजहर उल कमर, अध्यक्ष, जिला ओलंपिक संघ, अलीगढ़
स्विमिंग करने से पहले शरीर पर नारियल तेल या लोशन की पतली परत सुरक्षा कवच का काम करती है। चश्मा और कैप लगाने से आंखों के कॉर्निया और बालों की जड़ों की सुरक्षा होती है। पूल में जाने से पहले और बाद में शॉवर लेना चाहिए।
- डॉ. नवालुर्रहमान, त्वचा विशेषज्ञ
कम गहराई में डाइव करने पर सिर व गर्दन को गंभीर चोट का खतरा हो सकता है। कंधे, गर्दन या रीढ़ पर असर, शरीर पर जोरदार झटका लग सकता है। डाइव करने के लिए कम से कम पानी की गहराई 9–12 फीट होनी चाहिए। हमेशा प्रशिक्षक की निगरानी में तैराकी सीखें।
- मोहम्मद मंसूर, विशेषज्ञ, स्विमिंग