अलीगढ़ (ब्यूरो)। असहिष्णुता पर पूरे देश में छिड़ी जोरदार बहस में कांग्रेस प्रवक्ता विवेक बंसल ने भाजपा की शीर्ष नेता और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि वर्ष 2004 में कांग्रेस नेतृत्व में जब यूपीए सरकार बन रही थी, तो यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए सुषमा स्वराज ने अपना सिर मुंडवा कर आमरण अनशन पर बैठने की धमकी दी थी। सही मायने में देश में पहली बार असहिष्णुता की शुरुआत वहीं से हुई।
सुषमा स्वराज का वह बयान भाजपा की विचारधारा और आरएसएस की उस धारणा बखूबी बयां करता है, जिसमें ये सिखाया जाता है कि जो हमारी विचारधारा को स्वीकार नही करेगा, हम उसके विरुद्ध इसी प्रकार का असहिष्णु व्यवहार करेंगे। सोनिया गांधी लगातार 10 साल कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपीए की चेयरपर्सन रहीं फिर भी न तो वह खुद और न ही राहुल गांधी किसी भी मंत्री पद पर रहे।
बंसल ने कहा है कि भाजपा के नेता बताएं कि क्या उस वक्त सुषमा स्वराज को ऐसा बयान देने के लिये कुछ दिया गया था..? अगर नहीं तो फिर आज प्रबुद्ध साहित्यकार, रचनाकार, संगीतकार और फि ल्मी सुपर स्टारों के बयानों पर सवाल क्यों उठ रहे हैं..?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेक इन इंडिया.. सबका साथ सबका विकास.. का नारा देश-विदेश में दे रहे हैं, फि र अपने देश के प्रबुद्धजनों की अवहेलना क्यों हो रही है..? गोधरा कांड के बाद गुजरात में भड़के सांप्रदायिक दंगों में उनकी भूमिका से असंतुष्ट होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सार्वजनिक मंच से उनको राजधर्म का पालन करने की नसीहत दी थी। आज अगर अटल जी स्वास्थ्य खराब होने से सक्रिय नहीं है तो क्या उनकी सीख भाजपा के लिए कोई मायने नहीं रखती है..?
अगर आज असहिष्णुता का मुद्दा एक साजिश है तो भाजपा नेता बताएं कि अटल बिहारी वाजपेयी के शासन में असहिष्णुता का वातावरण क्यों नहीं बना..? अगर संसद के शीतकालीन सत्र में प्रधानमंत्री असहिष्णुता रोकने पर संतोषजनक भरोसा नहीं दिला पाए, तो कांग्रेस आगे की रणनीति तय करेगी और प्रबुद्धजनों की पीड़ा दूर करने के लिये पूरे देश में सड़क से जेल तक संघर्र्ष करेगी।