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आसान नहीं था सफर: 50 हजार से चालू की बेकरी, अब पांच करोड़ पर पहुंची, दिल्ली समेत तीन राज्यों में है सप्लाई

Sun, 20 Apr 2025 02:41 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

एक शिक्षक ने 50 हजार लगाकर एक बिस्कुट बेकरी शुरू की। नौकरी और बेकरी के बीच संतुलन रखना बेहद कठिन था, लेकिन कड़ी मेहनत से उन्होंने दोनों ही भूमिकाओं को बखूबी निभाया। धीरे-धीरे बेकरी का काम बढ़ने लगा और दिल्ली समेत तीन राज्यों  तक उनके उत्पाद जाने लगे।
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जुगल किशोर अपने परिवार के साथ - फोटो : संवाद
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विस्तार
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वर्ष 1991 के एक दिन शिक्षक जुगल किशोर के दोस्त ने उनसे कहा कि आप केक बहुत अच्छा बनाते हैं, बताएं कब खिलवाएंगे। यह बात जुगल किशोर के दिमाग में घर कर गई। परिवार से सलाह कर 50 हजार की पूंजी से घर में ही बेकरी शुरू कर दी। आज वही बेकरी पांच करोड़ के टर्नओवर पर पहुंच चुकी है। दिल्ली एनसीआर सहित तीन राज्यों में इसके उत्पादों की सप्लाई है, लेकिन यहां तक का सफर जुगल किशोर के लिए आसान नहीं था।

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नौकरी और बेकरी के बीच रखा संतुलन
क्वार्सी बाईपास की आनंद विहार कॉलोनी निवासी जुगल किशोर बैकुंठ नगर गुरुद्वारे के गुरुगोविंद सिंह स्कूल में शिक्षक थे। वर्ष 1991 में उनके बेटे राघवेंद्र सिंह का जन्म हुआ। इसके एक साल बाद जब कृष्णा बिस्कुट बेकरी शुरू की तो घर के कुछ सदस्यों ने भी हाथ बंटाया। नौकरी और बेकरी के बीच संतुलन रखना बेहद कठिन था, लेकिन कड़ी मेहनत से उन्होंने दोनों ही भूमिकाओं को बखूबी निभाया। धीरे-धीरे बेकरी का काम बढ़ने लगा और आसपास के जिलों हाथरस, बुलंदशहर, मैनपुरी, फिरोजाबाद और बरेली तक उनके उत्पाद जाने लगे।

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2014 में बेटे ने काम संभाला

बेटे राघवेंद्र सिंह ने 2013 में डीएस कॉलेज से बीकॉम की शिक्षा पूरी की। इसके बाद राघवेंद्र ने अपने पिता के कारोबार को ही आगे बढ़ाने का फैसला किया। कारोबारी सफर में अहम मुकाम तब आया, जब 2019 में तालानगरी में रिद्धिमा फूड्स फैक्टरी शुरू की गई। इसके बाद कारोबार यूपी के साथ दिल्ली, एनसीआर और उत्तराखंड तक फैल गया। अलीगढ़ में इनके यहां बने बिस्कुट, रस्क, बन, ब्रेड, केक, फ्रूट केक कई राज्यों में अपने जायके की महक फैला रहे हैं।

पांच राज्यों में विस्तार का है लक्ष्य
राघवेंद्र का विवाह सन 2016 में मिथलेश से हुआ। दंपती की एक बेटी रिद्धिमा है। राघवेंद्र कहते हैं कि यूपी से निकल कर अब राजस्थान, हिमाचल और पंजाब में भी काम को बढ़ाना है।
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