अध्ययन में आए सामने
- डायरिया और टाइफाइड जैसी जलजनित बीमारियों में कमी दर्ज की गई।
- महिलाओं का पानी लाने में लगने वाला समय बचा, जिससे वे शिक्षा और रोजगार में समय दे पा रही हैं।
- वंचित बस्तियों तक भी जल पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
- पंप हाउस, ओवरहेड टैंक और पाइपलाइन की कार्यक्षमता की जांच की गई।
- ग्राम जल व स्वच्छता समितियों और जल सखियों की भूमिका अहम पाई गई।
- नल लगने से स्कूलों में बच्चियों की 90 फीसदी से ज्यादा उपस्थिति बढ़ी है।
12 विकास खंडों के 12 गांवों में अध्ययन
विकास खंड अकराबाद के गांव बहादुरपुर, अतरौली के गांव मीरगढ़ी, धनीपुर के गांव भोजपुर, चंडौस के के गांव पहावटी, जवां के गांव पड़ाका सुल्तानपुर, लोधा के गांव जतनपुर चिकावटी, बिजौली के गांव बाराहुल, गंगीरी के गांव देहली, खैर के गांव उदयगढ़ी, टप्पल के गांव छज्जूपुर, गोंडा के नगला कलावा, इगलास के बैलोठ में 363 घरों में अध्ययन हुआ।