विभाग के अध्यक्ष प्रो. मो. राशिद कहते हैं कि इस्लाम के साथ ही छात्र जब विभिन्न धर्मों के सिद्धांत, दर्शन, रीति-रिवाज़ और इतिहास को जानते हैं तो व्यापक दृष्टिकोण मिलता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि लोग क्यों कुछ विशेष तरीकों से सोचते या व्यवहार करते हैं। यह धार्मिक द्वेष, कट्टरता और पूर्वाग्रह को कम करने में सहायक हो सकता है।
इनका रहा नाता
सुन्नी धर्मशास्त्र विभाग का एक समृद्ध इतिहास है, जिसका नेतृत्व मौलाना सईद अहमद अकबराबादी, प्रो. काजी मजहरुद्दीन बिलग्रामी, प्रो. फजलुर रहमान गिन्नोरी, प्रो. तकी अमिनी, प्रो. जैनुस साजिदीन सिद्दीकी जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति के विद्वानों ने किया था। इन विद्वानों ने दुनिया भर में विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित सैकड़ों पुस्तकें लिखी थीं।
ये रहे छात्र
पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री व जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती पीएम सईद, पूर्व कुलपति प्रो. अख्तरुल वासे, इग्नू के पीवीसी प्रो. बसीर अहमद खान, इग्नू के पूर्व पीवीसी अशफाकुर रहमान।