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Aligarh Muslim University: मुस्लिम छात्र-छात्राएं पढ़ रहे वेद-पुराण, दी जा रही सिख-बौद्ध और जैन धर्म की शिक्षा

Thu, 02 Oct 2025 06:26 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

एएमयू के धर्मशास्त्र विभाग में जहां इस्लाम के साथ ईसाई धर्म को भी पढ़ाया जाता था। धीरे-धीरे विभाग में हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख धर्म की पढ़ाई होने लगी। न सिर्फ मुस्लिम अपने धर्म के साथ दूसरे धर्मों की पढ़ाई कर रहे हैं, बल्कि तुलनात्मक अध्ययन भी कर रहे हैं।
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एएमयू - फोटो : संवाद
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विस्तार
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एमयू के सुन्नी धर्मशास्त्र विभाग में मुस्लिम छात्र-छात्राएं वेद और पुराण पढ़ रहे हैं। अध्ययनरत विद्यार्थियों का मानना है कि दूसरे धर्मों की पुस्तकों को पढ़ने का मकसद अन्य धर्मों की भावनाओं को समझना है, ताकि समाज में सौहार्द कायम रहे।

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यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद अहमद ने धर्मशास्त्र विभाग की शुरुआत की थी, जहां इस्लाम के साथ ईसाई धर्म को भी पढ़ाया जाता था। धीरे-धीरे विभाग में हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख धर्म की पढ़ाई होने लगी। न सिर्फ मुस्लिम अपने धर्म के साथ दूसरे धर्मों की पढ़ाई कर रहे हैं, बल्कि तुलनात्मक अध्ययन भी कर रहे हैं। विभाग में ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, मनुस्मृति, गुरु ग्रंथ साहिब, जैन धर्म के तत्त्वार्थ सूत्र, आदिपुराण, समयसार, और बौद्ध धर्म के ग्रंथ त्रिपिटक, विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक पढ़ाए जाते हैं। विभाग में स्नातक में पहले साल 35 और परास्नातक में पहले साल 20 सीटों पर दाखिले होते हैं। 150 छात्र इस समय पढ़ रहे हैं। अलग-अलग धर्मों को पढ़ाने के लिए 10 शिक्षक हैं।

हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध धर्म को पढ़ रहे हैं। हिंदू और इस्लाम धर्म के जो सिद्धांत हैं, वह समान हैं। इस्लाम के साथ दूसरे धर्मों को भी समझ रहे हैं।-अब्दुल समद, बीए, सुन्नी धर्मशास्त्र
दूसरे धर्मों को पढ़ने में मुझे कोई परेशानी नहीं हैं। दूसरे धर्म समाज के लिए क्या है। उनके क्या सिद्धांत हैं। यह सब पढ़ने का मौका मिल रहा है।-सैयदा अक्सा सुलेमान, एमए, सुन्नी धर्मशास्त्र

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देखिए, विभाग में विद्यार्थियों को इस्लाम के साथ-साथ दूसरे मजहब को पढ़ाया जाता है। मजहब क्यों जरूरी हैं, यह भी बताया जाता है। यहां श्लोक, मंत्र के जाप से क्या होता है, यह भी बताया जाता है। समाज में आपसी सौहार्द्र और संवाद बेहतर हो, यही विभाग का मकसद है।-डॉ. रेहान अख्तर कासमी, असिस्टेंट प्राेफेसर, सुन्नी धर्मशास्त्र

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यह है उद्देश्य सभी धर्मों के अध्ययन का

विभाग के अध्यक्ष प्रो. मो. राशिद कहते हैं कि इस्लाम के साथ ही छात्र जब विभिन्न धर्मों के सिद्धांत, दर्शन, रीति-रिवाज़ और इतिहास को जानते हैं तो व्यापक दृष्टिकोण मिलता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि लोग क्यों कुछ विशेष तरीकों से सोचते या व्यवहार करते हैं। यह धार्मिक द्वेष, कट्टरता और पूर्वाग्रह को कम करने में सहायक हो सकता है।

इनका रहा नाता 
सुन्नी धर्मशास्त्र विभाग का एक समृद्ध इतिहास है, जिसका नेतृत्व मौलाना सईद अहमद अकबराबादी, प्रो. काजी मजहरुद्दीन बिलग्रामी, प्रो. फजलुर रहमान गिन्नोरी, प्रो. तकी अमिनी, प्रो. जैनुस साजिदीन सिद्दीकी जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति के विद्वानों ने किया था। इन विद्वानों ने दुनिया भर में विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित सैकड़ों पुस्तकें लिखी थीं।

ये रहे छात्र
पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री व जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती पीएम सईद, पूर्व कुलपति प्रो. अख्तरुल वासे, इग्नू के पीवीसी प्रो. बसीर अहमद खान, इग्नू के पूर्व पीवीसी अशफाकुर रहमान।
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