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पहली क्लास के छात्र को प्रिंसिपल ने बाथरूम में किया 1 घंटे तक बंद

Fri, 21 Dec 2018 06:35 PM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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कालेज के मुख्य द्वार पर लटका ताला। - फोटो : अमर उजाला
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अलीगढ़ के धनीपुर स्थित प्राइमरी स्कूल में गुरुवार को छुट्टी होने के बाद एक छह वर्षीय मासूम शौचालय में एक घंटे तक बंद रहा। जबकि दूसरी तरफ मां सीमा अपने मासूम बच्चे को ढूंढकर थक चुकी थीं। इसी दौरान प्राइमरी विद्यालय से सटे एक छत से जब स्कूल में पड़ोसियों ने निगाह डाली तो बताया गया कि बच्चा शौचालय में बंद है। 

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इसके बाद चाबी लाकर बच्चे को बाहर निकाला गया। तब कहीं जाकर मां की जान में जान आई। इस मामले में जांच के बाद बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने प्रधानाध्यापिका अमिता सिंह को निलंबित कर दिया है। बता दें कि गुरुवार दोपहर प्राइमरी स्कूल के शिक्षक स्कूल परिसर में ताला लगाकर सवा तीन बजे घर जा चुके थे। इसी विद्यालय की कक्षा एक में पढ़ने वाला बच्चा देव जब घर नहीं पहुंचा तो मां सीमा हैरान हो गई। 

इस पर पहले तो मोहल्ले में काफी तलाशा गया, फिर भी वह नहीं मिला तो परेशान होकर मां स्कूल पहुंची। यहां देखा तो ताला लगा हुआ था। इस दौरान बच्चे को भीतर बंद रोता-बिलखता देख काफी भीड़ जमा हो गई। इसी बीच एक बच्चे ने आकर बताया कि स्कूल के शौचालय में एक बच्चा बंद है। जो छत से दिख रहा है। गनीमत रही कि शौचालय की चाबी सफाई कर्मचारी पर रहती है। इस पर चाबी मंगाई गई और बच्चे को तकरीबन पांच बजे बाहर निकाला गया। 
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इस दौरान बच्चा थोड़ा सहमा व परेशान नजर आया। अपने बच्चे को सही सलामत देखकर मां सीमा की चेहरे की शिकन दूर हुई। इस मामले में बीईओ धनीपुर आलोक प्रताप श्रीवास्तव ने शुक्रवार दोपहर जांच की। उन्होंने एक घंटे बच्चे के बंद रहने की पुष्टि की है। साथ ही कहा कि बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय को सौंप दी है। रिपोर्ट आने के बाद बीएसए ने लापरवाही बरतने के मामले में प्रधानाध्यापिका अमिता सिंह को निलंबित कर दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी।

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कुंडी खटखटाने पर देव ने नहीं दिया था जवाब
शिक्षिकाओं ने बताया कि वह प्रतिदिन प्रत्येक कमरे व शौचालय को देखकर जाते हैं कि कोई बच्चा अंदर तो नहीं है। गुरुवार दोपहर भी शौचालय की कुंडी खटखटाई गई थी, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। इस कारण सभी स्कूल बंद करके चले गए।

साजिश की भी आ रही बू...
इस मामले में किसी साजिश की भी संभावना जताई जा रही है। इसका कारण है कि अगर शौचालय चेक ही किया गया था तो बच्चे के होने की जानकारी क्यों नहीं हुई। हो सकता है कि एक दूसरे के खिलाफ कार्यवाही कराने को लेकर जानबूझकर बच्चे को बंद किया गया हो। हालांकि इस मामले में बच्चों द्वारा शरारत करने के बारे में कहा जा रहा है। अब सवाल उठता है कि बच्चों ने शरारत की थी तो देव ने रोकर क्यों नहीं बताया। शुक्रवार को अमर उजाला ने जब देव से बात की तो वह कुछ नहीं बोला। हां हताश जरूर नजर आया।
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