पराली जलाने की घटनाएं रुक नहीं रहीं हैं। इस वर्ष अब तक अलीगढ़ मंडल में 33 ऐसे मामले पकड़े गए हैं। अलीगढ़ जनपद में खैर, टप्पल, लोधा और गोंडा ब्लॉक में सबसे ज्यादा घटनाएं हुईं हैं। इन मामलों में लिप्त किसानों को नोटिस जारी कर जुर्माना वसूली की तैयारी की जा रही है।
खास बात ये है कि इस वर्ष भी पूरे मंडल में पराली जलाने की घटनाएं वर्ष 2025 के बराबर हैं। वर्ष 2025 में धान के मौसम में अलीगढ़ में 22, हाथरस में छह, कासगंज में तीन और एटा में दो, कुल 33 घटनाएं सामने आईं थीं। इस वर्ष भी अब तक अलीगढ़ में 27, एटा में पांच, कासगंज में एक भी मामला नहीं पकड़ा गया है, इनकी भी कुल संख्या 33 है।
किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि पराली जलाने की घटनाएं कम हो सकें। कई जागरूक किसान अपनी पराली को दूसरे उपयोग में भी ला रहे हैं।-श्रवण कुमार, संयुक्त निदेशक कृषि विभाग
जुर्माना हुआ दोगुना
पराली जलाने पर लगने वाला जुर्माना दोगुना कर दिया गया है। इस वर्ष दो एकड़ पर पांच हजार, दो से पांच एकड़ पर 10 हजार और पांच एकड़ से अधिक भूमि पर 30 हजार रुपये जुर्माना वसूला जाएगा। वर्ष 2025 में यह रकम आधी थी। यानी दो एकड़ खेत की पराली जलाने का जुर्माना ढाई हजार, दो से पांच एकड़ तक पांच हजार और पांच एकड़ से ज्यादा भूमि पर 15 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया था।
सेटेलाइट से पकड़े जा रहे
भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के दो सेटेलाइट हैं। जिनकी मदद से पराली जलाने की घटनाओं को पकड़ा जाता है। सेटेलाइट पराली जलाने की फोटो खींचते हैं। इसकी रिपोर्ट विभाग को भेजी जाती है। कृषि विभाग राजस्व विभाग की मदद से लेखपाल से इसका सत्यापन कराता है। जिसके बाद जुर्माना वसूली का नोटिस जारी किया जाता है। राजस्व विभाग इसकी वसूली करता है।