हड़ताल समाप्त होने से पहले शुक्रवार को रात एक बजे तक मरीज और तीमारदार परेश्शान रहे। हड़ताल के चलते 100 के अधिक ऑपरेशन टल गए हैं। इलाज न मिल पाने के कारण अनूपशहर से आए एक वृद्ध की मौत हो गई। सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें यहां लाया गया था। यहां पता चला कि हड़ताल है। निजी अस्पताल पहुंचने से पहले उनकी मौत हो चुकी थी। आरडीए अध्यक्ष डा. मोहम्मद आसिम सिद्दीकी ने बताया कि हमारी सेवाएं इमरजेंसी के अलावा आईसीयू और आपरेशन थिएटर में भी रहती हैं। उन्होंने दावा किया है कि हड़ताल के चलते 100 से अधिक आपरेशन अब तक टल चुके हैं।
कब क्या हुआ
- 22 अप्रैल शाम 5.30 बजे - एएमयू के एथलेटिक्स मैदान पर हॉर्स शो के दौरान मारपीट
- 22 अप्रैल शाम 6.30 बजे - एक घायल जेएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी पहुंचा
- 22 अप्रैल शाम 6.35 बजे- कुछ लोगों ने डॉक्टरों से अभद्रता की, फायरिंग हुई
- 22 अप्रैल शाम 7.30 बजे - आरडीए ने इमरेंजसी ठप की, हड़ताल की घोषणा की
- 23 अप्रैल - सुबह से ही गंभीर मरीजों का इमरजेंसी से लौटना शुरू
- 24 अप्रैल - गोली लगने से घायल एक व्यक्ति सहित चार की मौत
- 25 अप्रैल - गतिरोध बरकार , 87 वर्षीय वृद्ध की भी मौत हुई, तीन दिन में 1800 मरीज लौटे
निजी एंबुलेंस वालों ने 30 फीसदी तक दाम बढ़ाए
मेडिकल कॉलेज में चल रही तीन दिन की हड़ताल का असर यह हुआ है कि शहर में निजी एंबुलेंस संचालकों ने 30 फीसदी तक दाम बढ़ा दिए हैं। आगरा, नोएडा और दिल्ली रेफर होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी तो एंबुलेंस की मांग भी अचानक बढ़ गई। जिस एंबुलेंस का किराया 1500 से 1800 रुपये तक था वह अब 2200 से 2500 रुपये तक ले रहे हैं।
हमारा आईसीयू फुल है। जो गंभीर मरीज आ रहे हैं, उनको मेडिकल कॉलेज के हायर सेंटर भेजा जा रहा है। डीडीयू अस्पताल में उपचार की सीमित सुविधा है। साथ ही डॉक्टरों की भी कमी है।
-डॉ. एमके माथुर, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, डीडीयू अस्पताल
अगर मरीजों को जानबूझ कर रेफर किया जा रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। अस्पतालों में अगर मरीजों का इलाज संभव है तो वहां पर उपचार मिलना ही चाहिए।
- संजीव रंजन, डीएम
कहां से कितने मरीज रेफर (प्रतिदिन औसतन)
- मलखान सिंह जिला अस्पताल से- 70
- डीडी संयुक्त अस्पताल से - 65
- निजी नर्सिंग होम व अन्य - 75
डीडीयू में उमड़ी मरीजों की भीड़, डॉक्टर नदारद
जेएन मेडिकल कॉलेज की हड़ताल से दीनदयाल संयुक्त अस्पताल (डीडीयू) पर बोझ लगातार बढ़ रहा है। मगर यहां पहुंच रहे मरीजों को दवाओं के साथ-साथ डॉक्टरों से उपचार भी नहीं मिल पा रहा। शुक्रवार को कुछ ऐसे ही हालात दिखे।आधा दर्जन डॉक्टरों वाली ओपीडी में एक ही डॉक्टर सुबह से मोर्चा संभाले हुए थे। इसके चलते काफी देर के इंतजार के बाद मरीजों को उपचार मिल सका। दीनदयाल अस्पताल में सामान्य दिनों में 1000 से 1500 तक मरीज ओपीडी में आते हैं। मगर इन दिनों मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में हड़ताल के चलते यहां भीड़ बढ़ रही है।
शुक्रवार को दिन की ओपीडी 2200 से अधिक रही। वहीं यहां दो चिकित्सकों की इमरजेंसी में ड्यूटी लगा दी गई। सुबह से ही भीड़ के बावजूद मात्र एक चिकित्सक ओपीडी में थे। जिसके चलते घंटों के इंतजार के बाद लोगों को उपचार मिल सका। यहां उपचार लेने आए तालशपुर के रमेश, बरोठा के झमनलाल, सिकंदराराऊ के राजकुमार, रामघाट की सावित्री ने बताया कि वह सुबह ही यहां आ गए। मगर चिकित्सक न होने के चलते दोपहर में इलाज मिल सका। सीएमएस डॉ. एमके माथुर का कहना है कि मेडिकल कॉलेज की हड़ताल से बोझ बढ़ा है। फिर भी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।