विशाल के दादा की फूल चौक पर पन्नालाल राधेश्याम सराफ के नाम से दुकान थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद विशाल सोचते थे कि सदियों पुराने कारोबार को नए जमाने और बदली जरूरतों के साथ कैसे ढाला जाए। इसी विचार ने विशाल को आधुनिक आभूषणों का शोरूम खोलने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2007 में सपना पूरा हुआ और मां स्वर्गीय मालती देवी की प्रेरणा से खुद का शोरूम शुरू किया।
नई पीढ़ी जुड़ रही कारोबार से
विशाल गुप्ता के परिवार में पिता रोहताश कुमार, पत्नी अंकिता वार्ष्णेय, बेटी अन्वेषा गुप्ता और बेटे अविरल गुप्ता हैं। साथ में बड़े भाई पवन कुमार गुप्ता और उनका बेटा मितांशु गुप्ता भी व्यापार में सहयोगी हैं। यह कारोबार में नई तकनीक, आभूषण बनाने का तरीका, नक्काशी, लाइटवेट और हॉल मार्क एचयूआईडी आदि का समावेश कर रहे हैं। विशाल भी अपने कारोबार की कमान धीरे-धीरे युवा हाथों को सौंप रहे हैं।