अल्फिया के पिता इरफान खान ने कहा कि वह दुनिया में सबसे खुशनसीब पिता हैं, जिसकी बेटी ने उनके ख्वाब पूरे कर दिए हैं। घर और एक छोटी सी दुकान है, जो किराये पर है। दुकान में एक सिलाई मशीन भी है, जहां खुद कटिंग और सिलाई करते हैं। दिन में एक ही पैंट-शर्ट सिल पाते हैं। इसी से गुजर-बसर करते हैं। कभी-कभी सिलने के लिए कपड़े के न आने पर वह सब्जियां और फल भी बेचते हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए बच्चे ही असल पूंजी हैं। तरक्की के लिए केवल तालीम ही एक बेहतर रास्ता है। एएमयू से 12वीं में अल्फिया को 98 फीसदी अंक मिले थे, इसलिए एक कोचिंग सेंटर ने निशुल्क पढ़ाया था।
अम्मी कहतीं तुम पढ़ो, काम वह करेंगी : अल्फिया
अल्फिया ने कहा कि वह एक हृदय रोग विशेषज्ञ बनना चाहती हैं, जिसके लिए वह दिन-रात मेहनत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उन दिनों को नहीं भूल सकती, जब अब्बू उन्हें ई-रिक्शा में बैठाकर कोचिंग सेंटर भेजते थे। उनके पीछे साइकिल वह आते थे, क्योंकि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी कि दोनों लोग ई-रिक्शा से आ और जा सकें। अम्मी ने कभी उनसे कोई काम नहीं कराया है, बल्कि वह कहतीं तो तुम पढ़ो। कभी शादी-विवाह में भी उन्हें नहीं भेजती। घरवालों ने खूब कुर्बानियां दी हैं।