हवलदार राम अवतार कारगिल में कुपवाड़ा और कारगिल में तैनाती रही। कारगिल में पैदल चढ़कर गए। शाम को टास्क मिल जाता था। 9 जुलाई को अटैक किया था और तोलोनिल पहाड़ी को लिया। 16 जुलाई को एक और पहाड़ी को दुश्मन से मुक्त करा लिया। खाना पीठ पर लेकर जाते थे।
पाकिस्तान से लगा बॉर्डर सील कर दिया था
कैप्टन मो. सलीम खान ने बताया कि वह कारगिल युद्ध के दौरान वह सांबा सेक्टर में तैनात थे। मेन कारगिल में जाने को रिजर्व में हमारी बटालियन को रखा गया था। बार्डर पर अलग-अलग बटालियन तैनात थीं। जितना बॉर्डर पाकिस्तान से लगा था उसे पूरा सील कर दिया था। उस समय संचार माध्यम भी टूट गए थे।कश्मीर की सबसे ऊंची पहाड़ी टाइगर हिल पर दुश्मन बैठ गया था। एयर स्ट्राइक से घेराबंदी लूज की और पैदल सैनिकों ने कब्जा लिया।
इंडियन वेटरंस ऑर्गनाइजेशन ने क्वार्सी बाईपास स्थित यश रेजीडेंसी में कारगिल विजय दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर मंडलायुक्त संगीता सिंह ने वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जिन सैनिकों ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, वे हमारे लिए सदैव सम्मानीय रहेंगे।
कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल से यश रेजीडेंसी तक निकाली गई भव्य तिरंगा यात्रा से हुआ। इसमें केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, ओडिशा, राजस्थान सहित कई राज्यों से आए संगठन के पदाधिकारी, पूर्व सैनिक, एनसीसी कैडेट्स और स्कूली छात्रों ने भाग लिया। इंडियन वेटरंस ऑर्गनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जोगेंद्र सिंह सेंगर और रिपर एडमिरल राजवीर सिंह ने कारगिल के नायकों का गर्मजोशी से स्वागत किया। रिपर एडमिरल राजवीर सिंह ने कारगिल युद्ध की जटिल रणनीतियों और सैनिकों के जमीनी अनुभवों को साझा किया।
कार्यक्रम में संस्था के केरल अध्यक्ष दिवाकर, तमिलनाडु अध्यक्ष राथा एम., हरियाणा से चरन सिंह मलिक, अरुणाचल प्रदेश से तातुंग तारो सहित जनक सिंह कुशवाह, जितेंद्र सिंह, जेके खान, आमिर मलिक, कर्नल आरके सिंह, बाबू सिंह जैसे कई वीर सैनिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन राष्ट्रीय महासचिव कैप्टन आसीन खां ने किया।