टनटनपाड़ा, बनियापाड़ा, उस्मानपाड़ा, जयगंज, वार्ड नंबर 85 और 87, सासनीगेट, बदामनगर, जीवनगढ़, केलानगर, इकरा कॉलोनी, अवंतिका फेज वन, राधिका एन्क्लेव, मेडिकल कॉलोनी, अब्दुल्ला गर्ल्स कॉलेज, एएमयू सर्किल, फ्रेंडस कॉलोनी, मैरिस रोड, आयकर भवन के पास। इसी तरह लगभग 50 मोहल्लों से कुत्तों को पकड़ कर उनकी नसबंदी की गई है।
कुल आबादी का तीन फीसदी होते हैं कुत्ते
नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश कहते हैं कि किसी भी शहर की कुल आबादी की लगभग तीन फीसदी संख्या में कुत्ते होते हैं। अलीगढ़ की आबादी अगर लगभग 15 लाख मान ली जाए तो कुत्तों की संख्या लगभग 45 से 50 हजार हो सकती है। ऐसे में नसबंदी का काम पूरा करने में लगभग पांच या छह वर्ष तक का समय लग सकता है।
यह भी जानें
- वर्ष 2017-18 में 2650 कुत्तों की नसबंदी हुई थी, यह दूसरा मौका
- 50,000 से अधिक कुत्ते शहर में होने का अनुमान
- 85,000 हजार रैबीज इंजेक्शन इस वर्ष अब तक लगे
- 1500 कुत्तों को अब तक नसबंदी के लिए पकड़ा गया
- 918 रुपये प्रति कुत्ता आ रहा नसबंदी का खर्च
- नर में 10 तो मादा में लगता है 20 मिनट का समय