दवा कंपनियों ने कहा है कि उन्हें राज्य प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट पर ऐतराज है। इस पर उन्होंने केंद्रीय प्रयोगशाला कोलकाता से जांच कराने का अनुरोध किया। अदालत ने दोनों का यह अनुरोध स्वीकारते हुए नमूनों की जांच कोलकाता की प्रयोगशाला से कराने की अनुमति दे दी है। जिसमें डीआई को नमूने फर्म को देने व फर्म द्वारा अपने खर्चे पर जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
औषधि प्रशासन विभाग को पहली बार दो दवा कंपनियों ने चुनौती दे डाली है। इसी चुनौती के क्रम में इन कंपनियों ने औषधि प्रशासन विभाग द्वारा दो दवा नमूनों की राज्य में कराई जांच व उसे अधोमानक मानने पर ऐतराज जताया है। इस पर अदालत ने इन दोनों फर्मों की आपत्ति स्वीकारते हुए इन दोनों नमूनों की केंद्रीय प्रयोगशाला कोलकाता से जांच कराने की अनुमति दे दी है।
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वाकया इस तरह है कि औषधि प्रशासन विभाग के डीआई दीपक कुमार लोधी ने टीम के साथ पिछले वर्ष 20 जुलाई जवां सिकंदरपुर के अग्रवाल मेडिकल स्टोर पर जांच की। यहां मोजोसेलिक चोट पर लगने वाले पेस्ट के नमूने लिए। इससे पहले इसी टीम ने 19 अप्रैल को भिलेट रामनगर तेहरा मोड़ के जेएस मेडिकल स्टोर से बेस्टी डीपीसी नामक कफ सीरप के नमूने लिए। इनकी जांच राज्य प्रयोगशाला में कराई गई। जिसे अधोमानक पाया गया। इसी आधार पर इन दोनों की निर्माता कंपनियों के खिलाफ अदालत में वाद दायर कराया गया।
इस वाद पर दोनों निर्माता कंपनियों ने अधोमानक रिपोर्ट को ऐतराज जताया है। साफ कहा है कि उन्हें राज्य प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट पर ऐतराज है। इस पर उन्होंने केंद्रीय प्रयोगशाला कोलकाता से जांच कराने का अनुरोध किया। अदालत ने दोनों का यह अनुरोध स्वीकारते हुए नमूनों की जांच कोलकाता की प्रयोगशाला से कराने की अनुमति दे दी है। जिसमें डीआई को नमूने फर्म को देने व फर्म द्वारा अपने खर्चे पर जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
यह अपने तरह का पहला मामला है, जिसमें किसी फर्म ने दवा की जांच रिपोर्ट पर ऐतराज जताया है। इस पर अदालत ने जांच कराने को अनुमति दे दी है। अब उनकी जांच कोलकाता से होगी। उसके बाद अग्रिम कार्रवाई तय होगी।-दीपक लोधी, डीआई