उत्तर प्रदेश सरकार ने पेपर स्टांप पर रोक लगाकर ई-स्टांप के चलन को बढ़ावा दिया है। मगर, जनता अभी ई-स्टांप की खरीद से कतरा रही है। पेपर स्टांप विक्रेता इसका फायदा उठा रहे हैं। पेपर स्टांप की कालाबाजारी हो रही है। 50 और 100 रुपये वाले स्टांप पर 50 से 100 रुपये अधिक वसूले जा रहे हैं। एआईजी स्टांप ज्ञानेंद्र कुमार ने इस कालाबाजारी से बचने और ई-स्टांप के क्रेता से लेकर विक्रेता तक के फायदे गिनाते हुए उनको इसकी खरीद के लिए जागरूक किया है। उन्होंने बताया कि जिले में अभी तक 38 लाइसेंस जारी किए गए हैं। 20 आवेदन पाइन लाइन में हैं।
एआईजी स्टांप ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि ई-स्टांप के जरिये लोग एक ही पेपर पर 10 रुपये से लेकर करोड़ों की रजिस्ट्री करा सकते हैं। इससे जहां रजिस्ट्री कराने में आसानी होगी, साथ ही उसे आजीवन सुरक्षित भी रखा जा सकता है। वहीं, दूसरी तरफ स्टांप वेडंर का लाइसेंस प्राप्त कर युवा खुद को आत्मनिर्भर भी बना सकेंगे। जिला प्रशासन की ओर से ऐसे युवाओं को लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं, जो कंप्यूटर में दक्ष हैं।
वेंडर के लिए कई फायदे
ई-स्टांप के तहत वेंडरों के लिए सीमा हटा दी गई है। पहले एक वेंडर एक बैनामे पर अधिकतम 15 हजार रुपये के स्टांप बेच सकता था। ई-स्टांप की व्यवस्था में ऐसी बंदिशें नहीं हैं। हर स्टांप पर उसे स्टाक होल्डिंग कंपनी से करीब .32 फीसद कमीशन मिलेगा। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। ई-स्टांप से स्टांप की कालाबाजारी और नकली रजिस्ट्री पर रोक लगी है। इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया आसान हो गई है। विभाग से फाइलों और कागजों का दबाव भी कम हो रहा है। स्टाक होल्डिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया से अधिकृत वेंडर ई-स्टांप खरीद सकते हैं। एक सामान्य ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरा कर वेंडर लॉग इन आइडी और पासवर्ड हासिल करेंगे। जानकारी के मुताबिक ई-स्टांप के लिए वेंडर को एक वालेट बन जाता है। जिससे वे ई-स्टांप की बिक्त्रस्ी कर सकते हैं। वालेट को स्टाक होल्डिंग कंपनी रीचार्ज करती है, जिसके लिए अग्रिम भुगतान करना होता है।