गाजियाबाद-अलीगढ़ एक्सप्रेस वे के गभाना टोल एवं आगरा-अलीगढ़ मडराक टोल निर्माण में करोड़ों की स्टांप चोरी मामले में दिल्ली की पार्टी को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए दस दिन का समय दिया गया है। कंपनी अब 7 मार्च को अपना पक्ष रखेगी। जबकि नियत तिथि पर अपना पक्ष रखने के लिए न आने वाली आगरा की कंपनी को नोटिस जारी किया गया है।
2010 में बने एनएच-91 गाजियाबाद टू अलीगढ़ एक्सप्रेस वे के गभाना टोल प्लाजा के निर्माण में उपायुक्त स्टांप अलीगढ़ मंडल ने 45.63 करोड़ की स्टांप चोरी पकड़ी थी। सरकार बनाम गाजियाबाद-अलीगढ़ एक्सप्रेस वे प्राइवेट लिमिटेड बसंत विहार नई दिल्ली को अपना पक्ष रखने के लिये डीएम डॉ. बलकार सिंह के न्यायालय ने गुरुवार को बुलाया था।
गुरुवार को कंपनी ने फिलहाल अपना पक्ष रखने में असमर्थता जताते हुए न्यायालय से जवाब दाखिल करने के लिये 25 दिन का समय मांगा। इसे अस्वीकार करते हुए न्यायालय ने कंपनी को नियमानुसार 10 दिन का समय देते हुए कंपनी को सात मार्च को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिये हैं। इधर एनएच 93 (आगरा टू अलीगढ़) सेक्शन में मडराक टोल की भूमि मामले में हुई 9.99 लाख की स्टांप चोरी पकड़ी गई थी। इस मामले में आगरा के कमला नगर की बृज भूमि एक्सप्रेस वे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर से अपना पक्ष रखने के लिए कोई नहीं आया। इस पर कार्रवाई करते हुए न्यायालय ने कंपनी को नोटिस भेजा है।