सीएमओ कार्यालय पर अपनी मांगो को लेकर धरना प्रदर्शन करते संविदा कर्मचारी।
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स्वास्थ्य विभाग में संविदा कर्मियों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। ओमिक्रॉन वैरिएंट के खतरे के बीच कोविड टीकाकरण, जांच से लेकर ओपीडी एवं अन्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। आंदोलित नेताओं को बुलाकर सीडीओ एवं सीएमओ ने समझाने का प्रयास किया लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। संविदा कर्मचारियों के नेता अधिकारियों पर दबाव बनाने का आरोप लगा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के हड़ताल के कारण जनपद कोविड टीकाकरण में पिछड़ता जा रहा है। हड़ताल के पहले जहां प्रति दिन 35 हजार से अधिक लोगों का टीकाकरण हो रहा था, वह घटकर 10 से 14 हजार के बीच सिमट गया है। शुक्रवार को 13858 लोगों को ही कोविडरोधी टीका लग पाया। कोविड सैंपलिंग का कार्य भी प्रभावित होने की आशंका है। महानगर में 18 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, जो संविदा पर तैनात 15 चिकित्सकों के भरोसे चल रहे थे। ऐसे इन केंद्रों पर ओपीडी सेवाएं नहीं हो रही हैं। टीकाकरण भी प्रभावित हुआ है। फिलहाल, प्रशिक्षु टीका लगा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाएं डगमगाने लगी हैं। ओमिक्रॉन वैरिएंट के खतरे में बीच संविदा कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य विभाग भी हिल गया है।
ऐसे में शाम को मुख्य विकास अधिकारी अंकित खंडेलवाल सीएमओ आफिस पहुंचे। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. अजीत सिंह, जिला मंत्री डॉ. राकेश कुमार एवं प्रदेश महिला संगठन मंत्री शुमायला को फोन कर सीएमओ आफिस बुलाया गया। डॉ. अजीत सिंह ने अधिकारियों पर धरना समाप्त करने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया। अधिकारियों का कहना है कि ओमिक्रॉन के खतरे एवं टीकाकरण अभियान को देखते हुए धरना समाप्त कर काम पर लौट आएं। डॉ. अजीत का कहना है कि प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर धरना चल रहा है। वह साथियों के साथ ही कोई निर्णय ले सकते हैं। अकेले में कोई फैसला नहीं ले सकते। इस संबंध में सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। बार-बार पूछे जाने के बावजूद संघ नेताओं से बातचीत एवं दबाव के के संबंध में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।