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AMU: पांच साल चला शोध, सुखद आया परिणाम, खास स्प्रे से बढ़ा मिर्च का तीखापन और स्टीविया की मिठास

Mon, 16 Mar 2026 10:35 AM IST
Chaman Kumar Sharma इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

स्टीविया एक प्राकृतिक और शून्य-कैलोरी स्वीटनर है, जो स्टीविया रेबाउडियाना नामक पौधे की पत्तियों से प्राप्त होता है। इसे मीठी तुलसी या मधु पत्ती भी कहा जाता है। यह चीनी से 200-350 गुना अधिक मीठा होता है, जो मधुमेह रोगियों और वजन कम करने वाले लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।
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एएमयू - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के वैज्ञानिकों ने एक खास स्प्रे तैयार किया है। वनस्पति विभाग के प्लांट फिजियोलॉजी व बायोकेमिस्ट्री सेक्शन में एक विशेष प्रकार के जैविक घोल से एक स्प्रे बनाया गया। जिससे मिर्च में तीखापन और स्टीविया में मिठास बढ़ गई।

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पांच साल तक प्रो. मुईन उद्दीन के निर्देशन में संग्राम सिंह ने उपचारित चिटोसान (आईसीएच) और सोडियम एल्जिनेट (आईएसए) के विभिन्न घोलों का पौधों पर परीक्षण किया गया। लाल मिर्च और स्टीविया पौधों पर इसके प्रभावों की जांच की गई। 80 मिलीग्राम प्रति लीटर आईसीएच का छिड़काव मिर्च के पौधों के लिए प्रभावी साबित हुआ। इससे पौधे की ऊंचाई, पत्तियों का क्षेत्रफल, फल का वजन, क्लोरोफिल और कैरोटिनॉयड की मात्रा में 30 से 60 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई। मिर्च में पाए जाने वाले तीखे तत्व कैप्साइसिन की मात्रा भी बढ़कर लगभग 6.74 मिलीग्राम प्रति ग्राम तक पहुंच गई, जबकि सामान्य स्थिति में यह लगभग 4.56 मिलीग्राम प्रति ग्राम थी।

इसी तरह स्टीविया पर किए गए प्रयोग में भी आईसीएच का 80 मिलीग्राम प्रति लीटर घोल सबसे प्रभावी पाया गया। इससे पौधों की वृद्धि के साथ-साथ पत्तियों में मौजूद स्टेवियोसाइड और रेबाउडियोसाइड-ए जैसे प्राकृतिक मिठास देने वाले तत्वों की मात्रा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। शोध के तीसरे और चौथे चरण में सोडियम एल्जिनेट का प्रयोग किया गया। इसकी 120 मिलीग्राम प्रति लीटर की मात्रा मिर्च और स्टीविया दोनों पौधों के लिए सबसे बेहतर पाई गई। इससे पौधों की वृद्धि, पोषक तत्वों की मात्रा और औषधीय यौगिकों का स्तर स्पष्ट रूप से बढ़ा। 

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महत्वपूर्ण परिणाम तब सामने आए जब आईसीएच और आईसीए के संयुक्त प्रयोग किए गए। आईसीएच-80 और आईसीए-120 का संयोजन सबसे प्रभावी रहा। इस संयोजन से मिर्च में कैप्साइसिन की मात्रा बढ़कर लगभग 7.57 मिलीग्राम प्रति ग्राम तक पहुंच गई, जो सामान्य पौधों की तुलना में अधिक है। वहीं, स्टीविया की पत्तियों में भी स्टेवियोसाइड और अन्य जैव तत्वों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

वनस्पति विभाग के प्लांट फिजियोलॉजी व बायोकेमिस्ट्री सेक्शन में हुए शोध में कैप्साइसिन के तीखे तत्व और स्टीविया की मिठास में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी दर्ज होना है। इस तकनीक का उपयोग कृषि और औषधीय पौधों की खेती में उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।-प्रो. विभा शर्मा, मेंबर इंचार्ज, जनसंपर्क अधिकारी, एमएयू।

क्या है स्टीविया
स्टीविया एक प्राकृतिक और शून्य-कैलोरी स्वीटनर है, जो स्टीविया रेबाउडियाना नामक पौधे की पत्तियों से प्राप्त होता है। इसे मीठी तुलसी या मधु पत्ती भी कहा जाता है। यह चीनी से 200-350 गुना अधिक मीठा होता है, जो मधुमेह रोगियों और वजन कम करने वाले लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।
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