जीवन कब किस मोड़ पर थम जाए, कोई नहीं जानता। संजय कुमार को भी यह आभास नहीं था कि ससुर की मौत की खबर पर गमी में शामिल होने के लिए हाथरस जाने का यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन जाएगा। करीब सात घंटे में ही मां और बेटी दोनों का सुहाग उजड़ गया।
गाजियाबाद में रहने वाली बेटी मीनू को पिता पप्पू सिंह के देहांत की खबर बृहस्पतिवार सुबह चार बजे मिली तो उसका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वह पति संजय कुमार व देवरानी सीमा के साथ सुबह गाड़ी संख्या 64167 ईएमयू पैसेंजर ट्रेन से गढ़ी बलना, हाथरस आ रहीं थी।
मीनू के अनुसार, सुबह करीब 10.30 बजे ट्रेन महरावल स्टेशन पार कर अलीगढ़ स्टेशन की ओर बढ़ी, तभी संजय को सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। वह कुछ बोल पाते उससे पहले ही वह सीट से गिर गए और बेसुध हो गए। अस्पताल में चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
संजय दो बच्चों के पिता थे। बड़ा बेटा आरव 13 साल का है और छोटा बेटा आदर्श 10 साल का है। घटना की सूचना पाकर बच्चों के साथ गाजियाबाद से अलीगढ़ पहुंचे संजय के छोटे भाई अजय कुमार ने बताया कि तीन भाई-बहनों में संजय सबसे बड़े थे। देर शाम संजय का पैतृक गांव मीरपुर-नूर नगला में अंतिम संस्कार कर दिया गया। बच्चों के सिर से पिता का साया उठने से उनका रो-रोकर बुरा हाल है।