शाहिद प्रेमपाल सिंह के छोटे भाई महिपाल सिंह बताते हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध चल रहा था, उसी समय प्रेमपाल के शादी की तैयारी चल रही थीं। युद्ध के चलते शादी की तारीख और बड़ा दी थी। घर में खुशी का माहौल था। जिस घर में दुल्हन आने का इंतजार था, उस घर में चार जुलाई 1999 को प्रेमपाल सिंह के कारगिल युद्ध में शहीद की सूचना आ गई। घर में खुशी का माहौल काफुर हो गया। आठ जुलाई को पार्थिव शरीर आया, तो पूरे गांव में जन सैलाब उमड़ पड़ा। बेटे के शहीद होने पर मां ने छ:माह तक खाना नहीं खाया था।
हाईस्कूल पास होते ही हो गए सेना में भर्ती
शहीद प्रेमपाल सिंह का जन्म 16 दिसंबर 1979 को इगलास तहसील के गांव खेमकवास में हुआ था। हाई स्कूल करने के बाद 1997 में प्रेमपाल सिंह का चयन आर्मी रेजीमेंट में हो गया था। ट्रेनिंग के लिए सागर मध्य प्रदेश भेजा गया। ट्रेनिंग के बाद पहली पोस्टिंग ग्लेशियर में हुई। 6 माह तक ग्लेशियर रहने के बाद कारगिल भेज दिया गया। प्रेमपाल पढ़ाई के साथ खेलकूद में सबसे आगे रहते थे। प्रेमपाल को कबड्डी और लंबी कूद पसंद था।
शहीद प्रेमपाल के परिवार को सरकार ने खैर में गैस एजेंसी आवंटित की थी। वहां पर प्रेमपाल का छोटा भाई महावीर सिंह अपने परिवार के साथ रहते हैं। पिता शिव सिंह की करीब पांच माह पहले मौत हो चुकी है। मां गांव में अकेली रहती है। मां ने बताया कि बेटे की समाधी के बाहर पानी भरा रहता है, निकलने में काफी दिक्कत होती है। प्रधान से कई बार शिकायत भी की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। घर के बाहर बारिश के दिनों में पानी भर जाता है।