गणतंत्र दिवस पर कुलपति को काले झंडे दिखाने के बाद पूरे दिन और रात को हुए घटना क्रम से खुफिया एजेंसियों का मानना है कि पुरानी चुंगी को शाहीन बाग में बदलने की तैयारी थी। इसके लिए जमालपुर से भी महिलाओं को बुलाया गया था और उन्हें बैठने के लिए फ्लैक्स (होर्डिंग बैनर की शीट) उपलब्ध कराए गए थे। इसी को देखते हुए पुरानी चुंगी पर जबरदस्त फोर्स तैनात किया गया था।
रविवार को गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कुलपति को काले झंडे दिखाए गए। इसके बाद चार छात्रों को पकड़ गया। पूर्व छात्र फराज मुर्तजा को जेल भेज दिया गया। यहीं से मामला भड़कना शुरू हुआ। अब प्रदर्शन कैंपस से बाहर पुरानी चुंगी पर आ गया। यहां पर सड़क पर ही धरना शुरू हो गया। जमालपुर से महिलाएं बुलाई गईं। उनके बैठने की व्यवस्था की गई।
इंतजामों से लगा कि लंबे अभियान की तैयारी है। इसके बाद मौके पर भारी पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस प्रशासन का माथा तब ठनका जब कैंपस में तीनों चारों छात्रों के गुटों को समझाया गया और विश्वास में लिया गया कि अहमद मुर्तजा को सोमवार को रिहा कर दिया जाएगा। वह मान भी गए। इसके बाद भी जमालपुर और आसपास के इलाकों से पुरानी चुंगी पर भीड़ जमा होनी शुरू होती रही। इनको हटाने में पुलिस को घंटो कवायद करनी पड़ी। इससे संकेत माना गया कि पुरानी चुंगी को शाहीन बाग बनाने की तैयारी थी।
कई घेरों में थी कुलपति की सुरक्षा
रविवार को समारोह के दौरान कुलपति प्रो. तारिक मंसूर का सुरक्षा घेरा बेहद कड़ा था। कुलपति की सुरक्षा कई घेरों में थी। पहले घेरे में ब्लैक फोर्स था और कुलपति को मिले गनर थे। दूसरे घेरे में एएमयू के सुरक्षा गार्ड और प्राक्टर टीम थी। तीसरे घेरे में सादा वर्दी में सुरक्षा कर्मी थे। एएमयू प्रशासन को इनपुट था कि कुलपति के नजदीक पहुंच कर असहज स्थिति पहुंचाने का प्रयास था। लेकिन इस काम में सफल नहीं हो सके।
कुलपति को काले झंडे दिखाने और नारेबाजी करने के आरोपी की जमानत एएमयू प्रोफेसरों ने ली है। साथ ही प्रशासन को भी भरोसा दिलाया है कि भविष्य में यह शांति व्यवस्था को भंग नहीं करेंगे। प्रशासन इस बात पर मंथन कर रहा है कि यह पहली बार है कि किसी प्रकरण में एएमयू के शिक्षक सीधे तौर पर दखल दे रहे हैं। आगे आकर जमानत ली है। इसके कई मायने पुलिस प्रशासन भी निकाल रहा है और एएमयू प्रशासन भी इस नई स्थिति को लेकर विचार विमर्श कर रहा है। इसके निहितार्थ समझे जा रहे हैं।