हींग नगरी के रूप में विख्यात साहित्य प्रेमियों के शहर हाथरस से उठी चिंगारी तालानगरी तक पहुंच रही है। हाथरस में एक तरफ जहां सवर्णों के विरोध में खड़े होने के बाद वहां जातीय तनाव की स्थिति है। कमोबेश यही हालात तालानगरी में भी पैदा होने लगे हैं। अब तक अनुसूचित जाति के लोग ही इस कांड को लेकर विरोध कर रहे थे, मगर अब सवर्ण समाज (खासतौर पर क्षत्रिय व ब्राह्मण) के लोग भी विरोध में आने लगे हैं।
शुक्रवार को धनीपुर मंडी के पास शनिवार को जलाली में हाथरस के सांसद का पुतला फूंककर सवर्णों ने आंदोलन का एलान कर दिया है। पूरे कांड की सही जांच की मांग उठाई जा रही है। इसे लेकर खुफिया एजेंसियां सतर्क हैं। पल-पल की टोह ली जा रही है। कहीं कुछ अप्रिय न हो, इस बात का ध्यान रखा जा रहा है। वहीं, जिले में हर तरफ एक ही प्रकरण पर चर्चा हो रही है। कोई कह रहा है कि घटना सही है। कोई इसके विपक्ष में तर्क देता दिखाई दे रहा है। कोई इसके मीडिया ट्रायल के विरोध में खड़ा हो रहा है। कोई राजनीतिक दलों की साजिश करार दे रहा है। जिले में पुलिस प्रशासनिक अमला भी अलर्ट है। हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। हर छोटी बड़ी सूचना को गंभीरता से लिया जा रहा है। किसी भी प्रदर्शन, विरोध पर पुलिस की निगरानी बनी हुई है।
अदालत से बाहर घटना का ट्रायल गलत : बार अध्यक्ष
अलीगढ़। दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेश शर्मा कहते हैं कि हाथरस में जो कुछ हुआ है, उससे जातीय तनाव बढ़ रहा है। प्रकरण में राजनीतिक दलों को अपनी रोटी सेंकने के बजाय कानून को अपना काम करने देना चाहिए। किसी भी आपराधिक घटना में राजनीतिक घटनाक्रम तनाव बढ़ाने का काम करते हैं। पुलिस को अपना काम करने देना चाहिए। इसके बाद अदालत का काम बचता है। अगर दोषी होगा तो सजा होगी और निर्दोष होगा तो बचेगा। अदालत से बाहर किसी भी अपराध की घटना का ट्रायल गलत है।
यूपी सरकार के मांगों को मानने के बाद आंदोलन की आवश्यकता नहीं : रक्षपाल
अलीगढ़। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (पीएसपी) के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. रक्षपाल सिंह ने कहा कि हाथरस की बेटी हत्याकांड में जब यूपी सरकार ने सारी मांगें मान ली और नार्को टेस्ट का आश्वासन भी दे दिया, तब विभिन्न दलों को आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं रह जाती। डॉ. सिंह ने कहा कि पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, एक मकान व घटना की जांच के लिए एसआईटी व प्रकरण से संबंधित लोगों का नार्को टेस्ट कराने का आश्वासन यूपी सरकार ने दे दिया है। ऐसी सूरत में आंदोलन करने की कतई आवश्यकता नहीं रह जाती है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों में आम भावना यह पनप रही है कि इस घटना में तीन आरोपी निर्दोष हैं और इसके लिए क्षेत्र में बैठकें हो रही हैं, जिससे जातीय टकराव की संभावना बन रही है, जो अनहोनी घटनाओं को जन्म दे सकती है। पीड़ित परिवार के लोगों द्वारा नार्को टेस्ट न कराने व आरोपियों के नार्को टेस्ट के लिए तैयार होने से नामजदगी पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसी विषम परिस्थिति में अब विभिन्न दलों के आंदोलनों से स्थिति विस्फोटक हो सकती है। उन्होंने कहा कि बेटी के गांव में राजनीतिक दलों की कार्रवाई पर रोक लगनी चाहिए।
हाथरस कांड में की गई कार्रवाई अपर्याप्त : आरडीए
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर हमजा मलिक ने हाथरस की घटना के संबंध में मुख्यमंत्री द्वारा अफसरों पर की गई कार्रवाई को अपर्याप्त ठहराया है। उन्होंने कहा है कि यह कार्रवाई सिर्फ दिखावे की है। मुख्यमंत्री के पास प्रदेश चलाने की कोई रणनीति नहीं है। बलात्कार के संबंध में मुख्यमंत्री को क्रिमिनल अमेंडमेंट एक्ट फरवरी 2013 द्वारा तय की गई परिभाषा को समझना होगा। डॉक्टर हमजा मलिक ने नार्को टेस्ट को लेकर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि पीड़ित का ही नार्को टेस्ट कराए जाने की बात से असहजता की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने की मांग की है।
आरोपियों के पक्ष का बयान
- मीडिया के माध्यम से यह जानकारी हुई है कि इस प्रकरण में पीड़ित परिवार ने सीबीआई जांच व नार्को कराने से इनकार कर दिया है। जब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी, कांड की सीबीआई जांच नहीं होगी और निर्दोषों को जेल से रिहा नहीं किया जाएगा, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। इस मामले में अब तक जितने भी राजनीतिक दल आए सामने आए हैं, उनसे अपील करते हैं कि वे दूर रहें। कानून को अपना काम करने दें। उनके दखल से कानून अपना काम नहीं कर पा रहा है। लोगों में तनाव का माहौल बन रहा है, जो गलत है।
- सुमंत किशोर सिंह ब्लाक प्रमुख पति हसायन
बेटी परिवार के पक्ष का बयान
- धर्मनिरपेक्ष देश में 70 साल बाद शीर्ष सत्ता में एक दुर्भाग्यपूर्ण परिवर्तन हुआ कि धर्म की रक्षा करने के नाम पर सरकार बनी। देश को आवश्यकता थी धर्म और जातिवाद को इतिहास बनाने की। मगर, उल्टा हो गया। हम धर्म के चौकीदार बन गए। मनु स्मृतियों के आधार पर स्वयं ही जातियों के ठेकेदार बन गए। मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश के अभिभावक हैं, परंतु धर्म और जातिवाद से ऊपर उठकर फैसला नहीं कर पा रहे हैं और इसी का नतीजा है कि स्थिति खतरनाक मोड़ पर आ चुकी है। संविधान और कानून की बात नहीं हो रही है। जातिवाद का रंग भरकर एक लड़की के साथ हुए घिनौने अपराध का उपहास उड़ाया जा रहा है। - रंजन राना सामाजिक कार्यकर्ता