सत्यप्रकाश और प्रेमवती देवी में बचपन से ही बेहद स्नेह था। सत्यप्रकाश अपनी बड़ी बहन की बेहद इज्जत करते थे। बहन भी छोटे भाई को बेहद स्नेह करती थीं। शादी के बाद भी आलम यह था कि बहन भाई रोजाना फोन पर बात कर एक दूसरे का हालचाल ले लेते।
कोतवाली के गांव उस्मानपुर में बीमार भाई को देखने आई बहन की हार्टअटैक से मौत हो गई। उसके करीब छह घंटे बाद भाई ने भी दम तोड़ दिया। इससे परिवारों में मातम छा गया। रामघाट में दोनों भाई बहन की आसपास चिता लगाकर अंतिम संस्कार किया गया।
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गांव उस्मानपुर निवासी सत्यप्रकाश (60) पुत्र नेत्रपाल किसान थे। कुछ समय से सांस रोगी होने के कारण उनकी तबीयत खराब हो गई थी। उनकी बड़ी बहन प्रेमवती देवी (62) बुलंदशहर के गांव गंगा गढ़ में ब्याही हैं। बीमार भाई को देखने के लिए एक सप्ताह पहले प्रेमवती देवी गांव आई थीं। सोमवार तड़के करीब पांच बजे प्रेमवती देवी की हार्टअटैक से मौत हो गई। परिवार के लोग उनका शव यहां से ससुराल ले गए। जहां उनके अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान करीब 11 बजे सूचना मिली कि सत्यप्रकाश ने भी दम तोड़ दिया। इस सूचना पर परिवार में मातम छा गया। उस्मानपुर से सत्यप्रकाश और गंगा गढ़ से प्रेमवती देवी का शव रामघाट लाया गया। जहां भाई बहन की आसपास ही चिता लगाकर अंतिम संस्कार किया गया।
भाई बहन में बचपन से था स्नेह
ग्राम प्रधान पति विनोद कुमार ने बताया कि सत्यप्रकाश और प्रेमवती देवी में बचपन से ही बेहद स्नेह था। सत्यप्रकाश अपनी बड़ी बहन की बेहद इज्जत करते थे। बहन भी छोटे भाई को बेहद स्नेह करती थीं। शादी के बाद भी आलम यह था कि बहन भाई रोजाना फोन पर बात कर एक दूसरे का हालचाल ले लेते। सत्यप्रकाश आए दिन बहन के पास उनकी ससुराल जाते थे, लेकिन कुछ दिनों से तबीयत खराब होने से वह जा नहीं सके थे। भाई की तबीयत खराब होने की सूचना पर प्रेमवती देवी उन्हें देखने गांव में आई थीं। सत्यप्रकाश ने उन्हें एक दो दिन रुकने को कहा तो वह उनका आग्रह नहीं टाल सकीं। सुबह हार्टअटैक से बहन के निधन की खबर सत्यप्रकाश सहन नहीं कर सके और उन्होंने छह घंटे के भीतर ही सदमे में दम तोड़ दिया। पूर्व जिपं सदस्य केपी मिस्त्री समेत कई लोग गांव पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया।