भोपाल जेल से सिमी के आठ आतंकियों के भागने की खबर ने स्थानीय एजेंसियों को अलर्ट किया था। मगर कुछ घंटों में ही खबर मिली कि वह आठों मार दिए गए। इसके बाद एजेंसियों ने राहत की सांस ली। मगर इस घटना के बाद अलीगढ़ में हलचल जरूर बढ़ गई। लोग 1977 में स्थापित इस संगठन को लेकर फिर से चर्चाएं करने लगे। एजेंसियां ऐसे लोगों की टोह लेने लग गईं कि कोई कहीं इस एनकाउंटर पर ऐतराज या विरोध तो नहीं कर रहा।
जमात-ए-इस्लामी की छात्र इकाई के रूप में अप्रैल 1977 में इस संगठन की स्थापना अलीगढ़ में शमशाद मार्केट पर कार्यालय बनाकर प्रो. मो.अहमदुल्लाह सिद्दीकी ने की। इसे एसआईओ (स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाइजेशन) का दूसरा रूप बताया गया। मगर जैसे-जैसे देश में सांप्रदायिक घटनाओं और देश विरोधी गतिविधियों में 1984 के बाद सिमी कार्यकर्ताओं के नाम सामने आने लगे तो इस पर प्रतिबंध की आवाज उठने लगी। पुलिस भी इस संगठन के खिलाफ काम करने लगी। इसके बाद से ही इसके शमशाद मार्केट कार्यालय पर लोगों की आवाजाही कम होने लगी। मगर 2001 में प्रतिबंध के बाद से वहां ताला लग गया। हालांकि 2008 में अल्प समय के लिए प्रतिबंध हटा, लेकिन वह फिर बरकरार हो गया। इसके आखिरी राष्ट्रीय अध्यक्ष शाहिद बद्र फलाही को प्रतिबंध के बाद जेल जाना पड़ा और जेल से रिहा होने के बाद वह आजमगढ़ में अपना क्लीनिक चलाते हैं।
अब सोमवार सुबह-सुबह जब भोपाल जेल से खंडवा से पकड़े गए आठ सिमी आतंकियों के भागने की खबर पर एजेंसियों ने स्थानीय कनेक्शन पर टोह लेना शुरू कर दिया। मगर शाम होते होते जब यह पता चला कि वह आठों मार दिए गए, तो टीमों ने राहत महसूस की। हां, अब इतना जरूर ध्यान दिया जा रहा है कि कहीं इस एनकाउंटर के विरोध में कोई आवाज तो नहीं उठ रही।
सांसद के पीए के अलीगढ़ कनेक्शन पर नजर
अलीगढ़। देश के खिलाफ जासूसी में पकड़े गए सपा सांसद मुनव्वर सलीम के कैराना निवासी पीए फरहत खान के अलीगढ़ कनेक्शन पर एजेंसियों ने काम करना शुरू कर दिया है। जानकारी में आया है कि उसका अलीगढ़ आना-जाना रहा है। यह जानने की कोशिश की जा रही है कि वह जब अलीगढ़ आया तो यहां किन लोगों से उसका मिलना-जुलना था। उसके यहां आने का मकसद क्या रहा। यहां कब आया था। इन तमाम सवालों का जवाब तलाशने के लिए एजेंसियां काम कर रही हैं।