श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर में सावन हो कोई भी महिना, सबुह हो या रात श्रद्धालु पूजा-अर्चना में मग्न देखे जा सकते हैं। वैसे मंदिर प्रात: 4 बजे खुलता है और रात 11 बजकर 30 मिनट पर बंद हो जाता है। पर श्रद्धालु देर रात तक पूजा करते दिख जाएंगे। मंदिर में सुबह 5 बजे और शाम 7 बजे अचलेश्वर महादेव की आरती की जाती है। मुख्य मंदिर के साथ-साथ यहां राधा-कृष्ण मंदिर, लक्ष्मी मंदिर और गंगा मंदिर में आरती की जाती है।
मंदिर में मेला आयोजन
श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर पर प्राचीन समय से ही मेलों का आयोजन होता रहा है। वर्तमान में यहां शिवरात्रि, तीज, राखी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मेला लगता है। महाशिवरात्रि पर श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए लाखों की संख्या में आते हैं। मंदिर के अंदर से जीटी रोड तक लंबी कतारें लग जाती हैं।
मंदिर संचालन समिति
श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर के संचालन के लिए एक नहीं दो-दो समिति हैं। एक है अचलेश्वर महासभा, जिसके अध्यक्ष पंकज सर्राफ हैं, तो दूसरी है अचलेश्वर सेवा समिति, जिसके अध्यक्ष मनोज वार्ष्णेय हैं। दो-दो समिति के रहते हुए भी मंदिर के पुजारी, सेवादार व उनके परिवार के रहने के लिए समुचित जगह नहीं है। मंदिर पुजारी ने दो समितियों के रहते हुए मंदिर के संचालन पर असंतोष जताया। पुजारिन विमला गोस्वामी ने बताया कि दो-दो समिति हैं, पर काम की कोई नहीं है। दोनों में मंदिर के पुजारी और सेवादारों को जगह नहीं दी गई।
मंदिर तक ऐसे पहुंचे
- श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर अलीगढ़ के बीचों-बीच स्थापित है। यहां मथुरा, दिल्ली, एटा, बुलंदशहर, नरौरा, आगरा से आया जा सकता है।
- मथुरा और आगरा से अलीगढ़ में प्रवेश करते ही सासनी गेट चौराहे से अचलताल पर पहुंचे।
- दिल्लीऔर बुलंदशहर से अलीगढ़ सारसौल से प्रवेश करते हुए पुराने बस स्टैंड पहुंचना हैं, वहां से अचलताल पहुंचा जा सकता है।
- एटा से अलीगढ़ में प्रवेश करते ही धनीपुर मंडी, एटा चुंगी, नौरंगाबाद होते हुए पुल पार कर अचलताल पहुंच सकते हैं।
- नरौरा से अतरौली होते हुए रामघाट रोड से क्वार्सी चौराहे से आगे पुल पार करते हुए अचलताल पर पहुंचा जा सकता है।
- श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर अलीगढ़ शहर के बीचों-बीच अचल सरोवर के पास स्थित है।
- अचलेश्वरधाम बाबा सिद्धपीठ हैं, जो भी मन से मनौती मांगता है, अवश्य पूर्ण होती है।
- मंदिर के अंदर पार्वती, नंदी और गणेश जी की प्रतिमा, शिवलिंग काफी नीचे स्थापित है। बताया जाता है कि इसमें आठ मन तक दूध आ जाता है।
- अचलेश्वर महादेव मंदिर नाम से ग्वालियर में भी एक मंदिर बना हुआ है।
- अचलेश्वर महादेव मंदिर के आस-पास श्री गिलहराज मंदिर है, जहां हनुमानजी गिलहरी के रूप में विराजमान है। नौ देवी मंदिर, दाऊजी मंदिर, गायत्री मंदिर, गौरा देवी और नटराज आदि मंदिर भी यहां माजूद हैं।
- श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर से लगते हुए स्मार्ट सिटी के अंतर्गत अचल सरोवर का सौन्दर्यकरण चल रहा है। भोलेनाथ की एक विशालकाय प्रतिमा मंदिर से देखने को मिल जाती है।
- श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर में शिवजी के मुख्य मंदिर के सामने हाल ही में नंदी बाबा की एक विशाल प्रतिमा त्रिशूल और डमरू के साथ स्थापित की गई, जो प्रमुख आकर्षण का केंद्र है।
पीढ़ी दर पीढ़ी आ रही मंदिर
अचलेश्वर महादेव मंदिर में बाबा अचलेश्वर की पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए कई परिवारों की पीढ़ी दर पीढ़ी आ रही है। यहां आकर शांति मिलती है और वो सब मिलता है, जो मांगा जाता है। कई भक्त तो कई सालों से रोजाना मंदिर पूजा करने अनवरत आ रहे हैं।