आशीष श्रीवास्तव
धनीपुर मंडी में दुकान निर्माण एवं आवंटन के नाम पर सेटिंग का खेल जमकर चल रहा है। चंद कागज के टुकड़ों की खातिर मंडी अफसर आवंटन प्रक्रिया की जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं तो किसान, फड़ लगाने वाले छोटे कारोबारी ही नहीं बड़े कारोबारी भी उनकी करतूत से परेशान हैं।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंडी परिषद के रिकार्ड में पिछले दो साल से एक भी दुकान का आवंटन नहीं हुआ है, लेकिन इस अवधि में यहां दो दर्जन से भी ज्यादा दुकानें बन गई हैं। हालत इस कदर बदतर हैं कि मंडी के शौचालय, सरकारी नल काटकर, पोखर की भूमि, पार्किंग यहां तक कि आम रास्तों तक में अवैध रूप से दुकानें बना डाली गई हैं। मंडी प्रशासन की नाक के नीचे हुए इस कृत्य में मंडी के कई बड़े अफसरों की कार्यप्रणाली पर अंगुलियां उठ रही हैं। यह दुकानें कैसे बनीं, क्या नियम था अथवा इनके आवंटन से कितना राजस्व मिला, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
कारोबारियों ने किया मंडी प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन
धनीपुर सब्जी मंडी में अवैध रूप से दुकानें बनने व इससे किसानों व ग्राहकों के लिए रास्ते संकरे होने से जाम की समस्या से परेशान कारोबारियों ने मंगलवार को मंडी में प्रदर्शन किया। दुकानदारों का आरोप था कि गत रात्रि भी मंडी अफसरों की मिलीभगत से सार्वजनिक शौचालय के सामने आठ दुकानें बनाई गई हैं। इसी के सामने पोखर को पाटकर दुकान बनवाई गई है। इस मौके पर बड़ी संख्या में कारोबारी मौजूद थे।
अवैध रूप से बनी दुकानों से रास्ते हुए संकरे
सब्जी मंडी परिसर में अवैध दुकान निर्माण कारोबारी, किसान एवं ग्राहकों के लिए नासूर बन गया है। पहले ही जर्जर पुलिया एवं गंदगी के साथ आवारा पशुओं के आतंक से जूझ रहे कारोबारियों को अपनी दुकान चलाने के लिए जगह नहीं मिल रही है। रोजाना जाम लग रहे हैं।
धनीपुर सब्जी मंडी में दुकानों के फर्जी आवंटन मेरे कार्यकाल से पहले के हैं। इनकी जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जहां तक अस्थायी दुकानों का सवाल है तो नियमानुसार लाइसेंस धारकों को जगह देने का प्रावधान है। रास्ते, शौचालय के पास, पोखर और अन्य स्थानों पर अवैध रूप से बनी दुकानों का चिन्हांकन कराया जाएगा। मंडी में फड़ के लिए जगह देने का कोई प्रावधान नहीं है।
विजेंद्र सिंह धनीपुर मंडी सचिव