अचल सरोवर की गुमटी पर स्थापित शिव प्रतिमा के दक्षिणमुखी होेने पर विवाद चल रहा है। इसके चलते यहां पर निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहा है। हालांकि, स्मार्ट सिटी व कार्यदायी संस्था के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट पास नक्शे के आधार पर ही चल रहा है। इसकी संरचना में कोई फेरबदल नहीं किया गया है। गौरतलब हो कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 25 करोड़ रुपये से अचल सरोवर का सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है।
अचल सरोवर की गुमटी पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत स्थापित हो रही शिव प्रतिमा के दक्षिणमुखी होने को लेकर कुछ धर्माचार्य व शहरवासी सवाल उठा रहे हैं। शिव प्रतिमा की दिशा बदलकर उत्तर (जीटी रोड) की तरफ करने के लिए कहा जा रहा है। लोहे व फाइबर से बनी चार टन की शिव प्रतिमा का अधिकांश हिस्सा स्थापित हो चुका है। विवाद के कारण तीन दिन कार्य रुका रहा। रविवार को स्मार्ट सिटी के अधिकारियों और कार्यदायी संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों के समक्ष मुद्दा रखा गया तो अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2021 में तत्कालीन कमिश्नर अजयदीप सिंह के सामने स्थानीय प्रबुद्धजन से वार्ता के आधार पर वास्तु को देखते हुए नक्शा तैयार किया गया था, जिसे एडीए ने पास किया था। इसके बाद स्मार्ट सिटी ने उप्र राजकीय निर्माण निगम को इसके निर्माण की जिम्मेदारी दी। पास किए गए ले-आउट के आधार पर ही अब दक्षिणमुखी शिव प्रतिमा स्थापित हो रही है। सामने आरतीघाट, मनोरंजन स्थल और वोटिंग क्लब है। इस परिसर में तुलसी वाटिका और यज्ञ स्थल भी बन रहा है। यह सब ले-आउट के आधार पर ही बन रहे हैं।
- तत्कालीन कमिश्नर अजयदीप सिंह ने क्षेत्रीय प्रबुद्धजनों के साथ बैठकर बातचीत की। विचारों के आधार पर ले-आउट तैयार हुआ। इसके बाद स्मार्ट सिटी ने निर्माण की स्वीकृति दी। ले-आउट के आधार पर 75 प्रतिशत ढांचा तैयार हो गया है। शिव प्रतिमा की दिशा बदलना बड़ी बात नहीं, ले-आउट के हिसाब से बनाए गए आरती घाट, मनोरंजन स्थल और वोटिंग क्लब की संरचना शिव प्रतिमा से अलग हो जाएगी। - हरिओम शर्मा, प्रोजेक्ट मैनेजर, उप्र राजकीय निर्माण निगम।
- शिव प्रतिमा की दिशा बदलने के विवाद को लेकर कांट्रेक्टर दीपक अग्रवाल से बातचीत की गई। जिनके द्वारा बताया गया कि आसपास के बुद्धिजीवी वर्ग व तत्कालीन अधिकारियों के साथ वास्तु को ध्यान में रखते डिजाइन तैयार हुआ। उसी के अनुरूप कार्य चल रहा है। ले-आउट से अलग एक भी कार्य नहीं चल रहा है। राजेश कौशल, स्मार्ट सिटी के डीजीएम
- ले-आउट को लेकर मुझे कोई जानकारी नहीं दी गई। स्थानीय लोगों के कहने पर मौके पर पहुंचा तो शास्त्र और भौगोलिक स्थिति के अनुसार प्रतिमा की दिशा बदलने के लिए कह रहा हूं। शास्त्रों की बातें बताता हूं। विवाद से कोई नाता नहीं है। दक्षिणमुखी से शहर के विकास कार्य अवरुद्ध हो जाएंगे। शास्त्रों में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए विधान होता है। लेकिन लेकिन उसका भी तो पालन नहीं कर रहे हैं। अधिकारी मनमानी करें, हम संत सही कहने में गुरेज नहीं करते हैं। - स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज।
अचल गुमटी में स्थापित है दक्षिणमुखी शिवलिंग
अचल सरोवर की गुमटी के ऊपर स्थापित हो रही शिव प्रतिमा के दक्षिणमुखी होने पर विवाद हो रहा है। मगर गौर करने वाली बात यह है कि अचल गुमटी में नीचे दक्षिणमुखी शिवलिंग ही स्थापित है।
अचल गुमटी पर जहां शिव प्रतिमा स्थापित हो रही है। उससे नीचे प्राचीन शिव मंदिर है। यहां दर्शन करने वाले लोग जानते हैं कि यह शिवलिंग भी दक्षिणमुखी है। ले-आउट तैयार करते वक्त यह तर्क भी दिया गया था। जबकि आसपास के लोग भी जानते हैं कि शिवलिंग दक्षिणमुखी है। जिसकी जलहरी पूर्व की तरफ है। अधिकारियों ने बताया कि इसी शिवलिंग की तर्ज पर ऊपर चार टन की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया गया। यह प्रतिमा इतनी बड़ी है कि यहां आने वाले लोग दूर से इसे देख सकेंगे।