महिला व बाल विकास मंत्रालय ने देश भर में महिला व बाल अपराध रोकने की दिशा में नया प्रयास शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में सोमवार को यूपी के 16 शहरों समेत देश के 100 शहरों के पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशाला दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें यूपी के अधिकारियों की ओर से यह सुझाव दिए गए कि छोटे जिलों में महिला व बाल अपराधियों के लिए शेल्टर होम खोलने की जरूरत है ताकि उन्हें वहां रखकर समाज की मुख्य धारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा सके।
महिला व बाल विकास मंत्रालय द्वारा देश के 100 ऐसे शहरों के पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों को दिल्ली में आयोजित वर्कशॉप में आमंत्रित किया, जहां महिलाओं व बालकों के प्रति अपराध होते हैं और महिला व बाल अपराधी सामने आते हैं। इनमें यूपी के अलीगढ़ सहित 16 शहर शामिल किए गए। अलीगढ़ से पुलिस अधीक्षक नगर कुलदीप सिंह गुणावत इस कार्यशाला में शामिल हुए।
सभी अधिकारियों से सुझाव लिए गए। जिसमें यही पूछा गया कि उनके द्वारा अब तक ऐसे अपराधियों को रोकने और महिला व बालकों के प्रति अपराध के समय क्या-क्या उपाए किए जाते हैं। साथ में इस विषय पर भी पूछा गया कि उनके जिलों में ऐसी क्या जरूरतें हैं, जिनकी मदद से ऐसे अपराधियों को सुधारकर समाज की मुख्य धारा में शामिल किया जा सके। इस दौरान यूपी के अधिकतर अधिकारियों के स्तर से यही दलील दी गई कि पुराने मंडल मुख्यालयों को छोड़ दें तो अधिकांश शहरों में बाल व महिला अपराधियों को रखने के शेल्टर होम नहीं हैं।
नशा मुक्ति केंद्रों की तर्ज पर शेल्टर होम जरूरी
इस मुद्दे पर खास चर्चा हुई कि छोटे शहरों में स्लम एरिया में निर्वासित बालक व महिलाएं नशे के दलदल में फंसते दिखते हैं। इसी की खातिर यह लोग अपराध भी करते हैं। इसलिए इन शहरों में नशा मुक्ति केंद्र की तर्ज पर शेल्टर होम खोले जाएं तो बेहतर होगा। इन शेल्टर होमों में इन लोगों को रखकर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए प्रेरित करने संबंधी काउंसलिंग भी कराई जाए।
योजनाओं से मिल रहे लाभ भी गिनाए
अधिकारियों ने यूपी में मिशन शक्ति के अलावा अन्य राज्यों में पोषण 2.0 व वात्सल्य जैसी योजनाओं पर चर्चा की। यहां बताया कि वे इन योजनाओं के चलते किस तरह महिला व बालकों के प्रति होने वाले अपराध में कमी ला रहे हैं। इसके अलावा इस वर्कशॉप में अन्य तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।