इस मौके पर युसुफ हातिफ ने ‘उर्दू की महफिलों को सजाते थे शहरयार, इल्मो अदब की बात बताते थे शहरयार, चर्चा है उनका आज जमाने में चारसू, इंसानियत का दरस पढ़ाते थे शहरयार’ शेर पढ़कर की। संयोजक गुलजार अहमद ने कहा कि कार्यक्रम का मकसद शहरयार साहब की जिन्दगी की तरह नये शायरों व कलाकारों को मंच देना है।
उन्होंने मांग की कि अमुवि के एनआरएससी हॉल का नाम बदलकर शहरयार के नाम पर कर दिया जाये। मुख्य अतिथि अमुवि पीवीसी सैयद अहमद अली ने कहा कि शहरयार जैसी शख्सियत बड़ी मुश्किल से पैदा होती हैं। हमें फक्त्रस् है कि वह अमुवि में ज्ञानपीठ एवार्ड लेकर आए। शहर मुफ्ती खालिद हमीद साहब ने गरीब बच्चों को शिक्षण सामग्री वितरित करते हुए कहा कि अगर इन्हें तालीम मिल जाए तो इन्ही में से न जाने कितने बच्चे शहरयार और गोपालदास नीरज बन जाएं।
कार्यक्रम में मो. यूसुफ हातिफ, वासिक संभली, डा. सरबर महारेरवी, शाकिर अलीगढ़ी, शाहनबाज अहमद, मो. ईरान जैसे शायरों ने अपना कलाम पेश किया। नन्हीं कलाकार गिना आफरीन ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। इस अवसर पर मो. रिहान, हाशिम अंसारी, मो. शहरोज, दिलशाद अहमद, शमशाद अहमद, सुहेब अंसारी, अब्दुल कासिम, डा. जफर, जहीर अहमद, सईदा खातून, अब्दुल कदीर, ममनून अख्तर, डा. तस्दुक, जॉनी फास्टर आदि उपस्थित रहे। संचालन उवैस जमाल शमसी द्वारा किया गया।