जमात के मरकजों में आने के समय निजामुद्दीन से लिखित फरमान लाया जाता है। वो यहां जमा होता है। इसमें जमात के प्रमुख व्यक्ति का नाम व अन्य लोगों की जानकारी होती है। इस जानकारी को रजिस्टर में रखा जाता है, जो जरूरत पड़ने पर एलआईयू व आईबी समय-समय पर लेती रहती है। अब इसी रिकॉर्ड को फिर से खंगाला जाएगा तथा रजिस्टर आदि की जांच की जाएगी।
आलिम हो सकता है परवेज
आम लोगों के लिए जमात का समय तीन दिन, चालीस दिन व चार महीने नीयत है। जबकि जिन लोगों पर डॉक्टर, इंजीनियर जैसी डिग्रियां होती है, वे एक वर्ष तक जमात में रहकर गांव-गांव जाकर तालीम दे सकते हैं। इन्हें आलिम कहा जाता है। संभावना है कि परवेज डॉक्टर होने के नाते जमात में आलिम हो तथा यहां आया हो। इसलिए पुलिस गहनता से छानबीन में जुट गई है।
मेडिकल में ड्यूटी कर रहा यासिर, साध रखी चुप्पी
कानपुर से जेएन मेडिकल कॉलेज में पढ़ने आया यासिर जेएन मेडिकल काॅलेज में ड्यूटी कर रहा है। हालांकि उसने चुप्पी साध रखी है। न वह ज्यादा किसी से बात कर रहा और न कोई प्रतिक्रिया दे रहा। साथ में वह अपने किराये के कमरे से ही आवाजाही कर रहा है। हालांकि शनिवार को उसके विषय में एजेंसियों ने एएमयू में पहुंचकर जानकारी जुटाई है। उससे गोपनीय तरीके से बात भी की है। मगर वह शनिवार को एएमयू में स्टाफ व साथियों के संपर्क में नहीं आ रहा। इसे लेकर तरह तरह की चर्चाएं हैं। मगर रविवार को वह ड्यूटी करते पाया गया। इस विषय में एएमयू प्राॅक्टर प्रो.वसीम अली इतना ही बताते हैं कि रविवार को यासिर ने ड्यूटी की है। अभी तक किसी एजेंसी ने उसके विषय में संपर्क नहीं किया है। वह सिविल लाइंस इलाके में किराये पर रह रहा है। उस पर हमारी पूरी निगरानी है।