नगर निगम में आउटसोर्स कर्मी के रूप में काम करने वाले सात कर्मचारियों ने बड़ा खेल कर दिया। क्षेत्र में जाकर गृहकर वसूली की। भवन स्वामियों को फर्जी रसीदें थम दीं। गृहकर के करीब 37 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा कराने के बजाय डकार गए। अब इन सातों आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के सिविल लाइंस थाने में तहरीर दी गई है।
आरोपियों में क्षेत्र में गृहकर वसूलने वाले कर्मचारियों के अतिरिक्त कर निर्धारण अधिकारी कार्यालय, स्वास्थ्य विभाग और गृहकर विभाग में तैनात तीन कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल हैं। तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में करीब 400 ऐसे मामले मिले हैं, जिनमें 37 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी सामने आई है। इनमें से छह कर्मियों को बीते सितंबर माह में ही बर्खास्त किया जा चुका है, जबकि एक अन्य कर्मचारी की सेवाएं शुक्रवार को समाप्त कर दी गईं। सातों आरोपी आउटसोर्स कर्मियों को भविष्य में नगर निगम में तैनाती से रोकने के लिए ब्लैकलिस्ट करने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
शिकायतें बढ़ी तो शुरू हुई जांच
नगर निगम के गृहकर विभाग ने आउटसोर्स कर्मचारियों को ई-पॉस मशीनें दी हैं। इन कर्मचारियों को घर-घर जाकर संपत्ति कर की वसूली करनी थी। आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर उपभोक्ताओं से रकम लेने के बाद उसे नगर निगम के खाते में जमा नहीं कराया गया। सिस्टम में हेरफेर कर भुगतान दर्ज दिखाया जाता था और उपभोक्ता को फर्जी रसीद दे दी जाती थी। यह घपलेबाजी तब सामने आई जब टैक्स जमा करने वाले उपभोक्ताओं के नए बिल में पुराना बकाया फिर जुड़कर आ गया। उपभोक्ताओं ने भुगतान की रसीद दिखाई तो पता चला कि रकम जमा ही नहीं हुई है। कई उपभोक्ताओं की शिकायत के बाद मामले की जांच तीन सदस्यीय समिति को साैंपी गई।
पहले छह पर कार्रवाई, अब सातवां भी बर्खास्त
प्रारंभिक जांच में दोषी मिलने पर नगर निगम ने सितंबर में छह आउटसोर्स कर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर शुभम सक्सेना, अमित कुमार, कॉल टेकर पंकज कुमार, बिल वितरक प्रशांत कुमार, सुमित सैनी और मनीष कुमार की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। जांच के आधार पर शुक्रवार को कंप्यूटर ऑपरेटर आशीष कुमार को भी बर्खास्त किया गया है। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने सातों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही भविष्य में नगर निगम में तैनाती पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में कर अधीक्षक बेचन प्रसाद की ओर से सभी आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाना सिविल लाइंस में तहरीर दी गई है।
आउटसोर्स वाले सात कर्मचारियों पर सरकारी अभिलेखों में कूटरचना, सरकारी धन के गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। विभागीय जांच के आधार पर उनकी सेवाएं समाप्त की गई हैं। अब एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। भविष्य में नगर निगम में उनकी तैनाती नहीं होगी। यह कार्रवाई प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है।
प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त