महामारी के दौरान सेवाएं दीं, बावजूद सहानुभूति नहीं: डॉ. मलिक
अलीगढ़। हटाए गए डॉक्टर मोहम्मद अजीमुद्दीन मलिक ने कहा है कि हमने महामारी के दौरान अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद भी हमारे संबंध में सहानुभूति से विचार नहीं किया गया। हम यहां पिछले ढाई तीन महीने से काम कर रहे थे। इस बीच ही हाथरस की घटना हुई। हमें नोटिस दिया गया है, जिसके संबंध में कहा गया है कि कुलपति का फोन आया था। जिसके बाद यह नोटिस जारी हुआ है। हमने भी पत्र लिखकर फैसले पर पुनर्विचार के लिए कहा है।
दूसरी जगह नौकरी छोड़ दी, फिर भी टर्मिनेट कर दिया: डॉ. उबैद
हटाए गए दूसरे डॉक्टर उबैद इम्तियाज उल हक ने कहा है कि यहां पर काम करने के लिए हमने दूसरी जगह की नौकरी छोड़ दी। इसके बाद भी हमें टर्मिनेट कर दिया गया है। हमको सीएमओ इंचार्ज की ओर से नोटिस दिया गया है, जबकि हमने अतिरिक्त रूप से अपनी सेवाएं यहां पर दी थीं।
हटाए गए डॉक्टरों से सीबीआई ने नहीं की थी पूछताछ
अलीगढ़। जेएन मेडिकल कॉलेज के पद से हटाए गए डॉ. उबैद इम्तियाज उल हक ने कहा कि सोमवार को जब सीबीआई की टीम मेडिकल कॉलेज आई थी तो उनसे कोई पूछताछ नहीं की गई। सीबीआई ने जो भी पूछताछ की वह विभागों के प्रभारी डॉक्टरों से की। उन्होंने कहा कि हमें पद से क्यों हटाया गया है, इसका कारण भी नहीं बताया गया है। पद से हटाए जाने का हम कारण जानना चाहते हैं। इसके संबंध में हमने कुलपति को पत्र लिखकर अवगत कराया है।
आरडीए ने जताई नाराजगी, विरोध करेंगे
अलीगढ़। आरडीए के अध्यक्ष डॉक्टर हमजा मलिक कहते हैं कि यह एकतरफा कार्रवाई है। डॉक्टरों को उनका कसूर भी नहीं बताया गया है। इसके अलावा डॉक्टरों से उनका पक्ष भी नहीं सुना गया है। हम इसके विरोध में जनरल बॉडी की मीटिंग बुलाएंगे। इसमें जो भी सर्वसम्मति से फैसला होगा, उसके अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।
हटाए गए दोनों डॉक्टरों ने जेएन मेडिकल कॉलेज से ही पीजी किया
अलीगढ़। जेएन मेडिकल कॉलेज में मेडिकल ऑफिसर के पद से हटाए गए दोनों डॉक्टर एमबीबीएस के बाद पीजी पूरा कर चुके थे। इसके बाद दोनों की नियुक्ति यहीं पर हुई। पद से हटाए गए दोनों डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने महामारी के चलते घरवालों के ऐतराज के बाद भी मानवता के हित में यहां मेडिकल कॉलेज में नौकरी पर जॉइनिंग की। लेकिन उन्हें बिना कोई कारण बताए और बिना जवाब दाखिल करने का समय दिए अचानक नौकरी से हटा दिया गया है।