अलीगढ़ (ब्यूरो)। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के नए कुलपति को लेकर कवायद शुरू हो गई है। अलग बात है कि इसके लिए नामों का पैनल बनाने से पहले यूजीसी अधिनियम 2010 को पूरी तरह स्वीकारना होगा। ऐसा नहीं करने पर यूजीसी एवं मानव संसाधन मंत्रालय पैनल रिजेक्ट कर सकता है। अधिनियम पूरी तरह स्वीकारनेे के बाद ही एएमयू के कुलपति के पद के लिए किसी आईएएस या सेना अधिकारी की नियुक्ति संभव है।एएमयू के नए कुलपति का पैनल बनाने के लिए 19 को एग्जीक्यूटिव काउंसिल एवं 20 मार्च को एएमयू कोर्ट की विशेष बैठक प्रस्तावित है। इस संबंध में अभी कोई कुछ कहने को तैयार नहीं, पर जानकारों की मानें तो कुलपति का पैनल बनाने के पहले एएमयू को पूरी तरह यूजीसी अधिनियम 2010 को स्वीकारना होगा। तर्क दिया जा रहा है कि एएमयू ने अभी तक पूरी तरह यूजीसी अधिनियम एडॉप्ट नहीं किया है। इसके चलते ही एएमयू के मौजूदा कुलपति जमीरउद्दीन शाह की नियुक्ति को लेकर चुनौती दी गई थी। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। यूजीसी अधिनियम 2010 के अनुसार सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति के लिए 10 वर्ष का प्रोफेसर का अनुभव अनिवार्य है, जो मौजूदा कुलपति के पास नहीं है। यूजीसी अधिनियम 2010 स्वीकार करने के बाद एएमयू में आईएएस एवं सेना के अधिकारियों की नियुक्ति भी बीते जमाने की बात हो जाएगी। कई आईएएस अधिकारी एएमयू कुलपति रह चुके हैं। दूसरी तरफ, विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा ईसी एवं कोर्ट की बैठक जल्दबाजी में बुलाए जाने को राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि ले. जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह 17 मई 2012 को कुलपति बने थे और 16 मई 2017 को उनका कार्यकाल पूरा होगा।