नुमाइश मैदान में चुनावी रैली में पीएम मोदी ने अपने चिर परिचित अंदाज में भाषण दिया। विरोधियों पर निशाना साधने से लेकर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने तक उनके चेहरे की भाव भंगिमा बदलती रही।
संबोधन में विपक्षियों पर निशाना साधते समय आक्रामक मुद्रा में रहे। रैली में उमड़ा जनसमूह उनके भाषण की हर अगली लाइन सुनने को बेताब रहा। अपने संबोधन में मोेदी ने हर वर्ग को साधा। युवाओं, महिलाओं, किसानोें, दलितों, गरीबों से सीधे संवाद कर उन्हेें जोड़ने कोशिश की। किसी वर्ग की दुखती रग पर पीएम ने हाथ रखा तो किसी वर्ग को अपनी सरकार की उपलब्धियां बताकर जोड़ने का प्रयास किया।
नुमाइश मैदान में चुनावी सभा में मोदी के संबोधन का अंदाज वही रहा, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। उन्होंने अपने भाषण में दर्जन भर बार भाइयों और बहनों वाक्य का प्रयोग किया। विरोधियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने हाव-भाव भी आक्रामक दिखाया।
जनसमूह से सीधे संवाद करते हुए उन्होंने हर बार जनता की ओर सवाल दागे और खुद उनका उत्तर भी दिया। फिर अपनी बात पर हामी भरवाई। अपने उद्बोधन में मोदी ने बेरोजगारी और यूपी में हुई सरकारी नौकरियों में भर्ती का मसला उठाकर युवाओं की दुखती रग पर हाथ रहा।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों पर इंटरव्यू प्रक्रिया समाप्त कर भ्रष्टाचार को समाप्त किया है। महिलाओं को उन्होेंने अपने संबोधन में कानून व्यवस्था से जोड़ा। उन्होंने अपने भाषण में यूपी सरकार पर निशाना साधा कि यूपी में महिलाएं छह बजे के बाद घरों से नहीं निकल सकतीं, क्योंकि यहां कानून व्यवस्था ध्वस्त है।