परिवहन विभाग द्वारा मांगे गए स्कूली बस चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी डाटा व चरित्र प्रमाण पत्रों को देने में शैक्षणिक संस्थान संचालक आनाकानी कर रहे हैं । परिवहन विभाग ने दो माह पहले शासन के निर्देश पर यह डाटा मांगा था। एआरटीओ अमिताभ चुतर्वेदी ने बताया कि अब विद्यालय संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। दो बार उनको सूचना देने के लिए नोटिस जारी किया गया जा चुका है। शासन के निर्देशों की अवहेलना का इनको दोषी माना जाएगा। विद्यालय संचालकों को आखिरी बार एक सप्ताह का समय दिया गया है।
स्कूल संचालक बस या जो भी अन्य वाहन विद्यार्थियों को लाने और छोड़ने के लिए चलवा रहे हैं । उनके चालकों को डाटा चरित्र प्रमाण पत्र सहित हर हाल में भेजना अनिवार्य है। पिछले दिनों डीएम की अध्यक्षता में हुई सड़क सुरक्षा सप्ताह की बैठक में भी इस बात को रखा गया था। डीआईओएस व बीएसए को इस मामले से अवगत करा दिया गया है।
एआरटीओ के मुताबिक जिले में प्राथमिक शिक्षा के सीबीएसई और हिंदी माध्यम के मिलाकर कुल 175 स्कूल हैं, जिनमें से 32 ने अपने चालकों के डीएल का सत्यापन कराया है। 13 ने चरित्र प्रमाण पत्र जमा किया है। माध्यमिक शिक्षा के सीबीएसई और हिंदी माध्यम के मिलाकर कुल 98 स्कूल हैं, जिनमें से 19 ने अपने चालकों के डीएल का सत्यापन कराया है।
79 ने चरित्र प्रमाण पत्र जमा किया है। उच्च शिक्षा के कुल 47 शैक्षणिक संस्थान हैं, जिनमें से एक ने ही डीएल का सत्यापन कराया है। चरित्र प्रमाण पत्र अभी तक किसी ने भी नहीं दिया है। इस रिकार्ड को डीएम की बैठक में पेश भी किया गया था। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि जो भी स्कूल संचालक डाटा उपलब्ध कराने में आनाकानी कर रहे हैं या जिनके पास डाटा मौजूद ही नहीं है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।