मुक्ता राजा। बीजेपी शहर प्रत्याशी
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शहर क्षेत्र के भाजपा विधायक संजीव राजा की पत्नी मुक्ता राजा शहर क्षेत्र से भाजपा की प्रत्याशी होंगी। बुधवार देर शाम इसकी घोषणा के बाद बारहद्वारी यूसुफगंज स्थित विधायक के आवास पर खुशी की माहौल है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह ने बुधवार शाम को तमाम तरह की अटकलों पर विराम लगाते हुए विधायक संजीव राजा की पत्नी मुक्ता राजा को प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसकी सूचना आने के बाद विधायक के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। यूसुफगंज स्थित विधायक संजीव राजा के आवास पर कार्यकर्ताओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। विधायक संजीव राजा एवं प्रत्याशी मुक्ता राजा ने पार्टी नेताओं के प्रति आभार प्रकट किया। भाजपा के महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत ने कहा कि पार्टी के निर्णय का स्वागत है। चुनाव लड़ाने के लिए कार्यकर्ता तैयार हैं। उनकी घोषणा पर खुद विधायक ने आभार जताया है। विधायक अनिल पाराशर, राजेंद्र वार्ष्णेय, चीफ, पूर्व मेयर शकुंतला भारती, एबीवीपी के बल्देव शीटू चौधरी, जय यादव आदि तमाम लोगों ने पहुंचकर आभार जताया।
1991 में संजीव के संग परिणय सूत्र में बंधी थी मुक्ता
शहर विधानसभा क्षेत्र की भाजपा प्रत्याशी मुक्ता राजा की 1991 में संजीव राजा से शादी हुई थी। संजीव राजा छात्र जीवन से आरएसएस एवं एवीबीपी से जुड़े रहे हैं। उनकी राजनीतिक सक्रियता में मुक्ता राजा का हमेशा सहयोग मिला है। 28 मई 1966 में जन्मी मुक्ता राजा ग्रेजुएट हैं। 1981 में हाईस्कूल, 1983 में इंटर एवं 1986 में ग्रेजुएशन की हैं।
चार दिन के इंतजार के बाद प्रत्याशी की घोषणा
जनपद के सात में से छह विधान सभा क्षेत्र के प्रत्याशियों की घोषणा भाजपा द्वारा 15 जनवरी को ही कर दी गई थी। सिर्फ शहर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी की घोषणा रह गई थी। थाना बन्नादेवी क्षेत्र के 22 वर्ष पुराने पुलिसकर्मी के साथ मारपीट के मामले में विधायक संजीव राजा को दो साल की सजा सुनाई गई है। इसके खिलाफ संजीव राजा उच्च न्यायालय की शरण में गए हैं। 24 जनवरी को सुनवाई की तिथि मिली थी। संजीव राजा के अधिवक्ता द्वारा पहले सुनवाई का आग्रह किया गया था। माना जा रहा है कि उच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण शहर विधान सभा क्षेत्र के प्रत्याशी के चयन में देरी हो रही थी। पार्टी द्वारा संजीव राजा की पत्नी मुक्ता राजा को प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद तमाम तरह की चर्चाओं पर विराम लग गया है।