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अलीगढ़ः 25 दिन, 7 राज्य, 20 शहर...4069 किमी का सफर तय कर काटी फरारी

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अभिषेक शर्मा
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संदीप गुप्ता हत्याकांड के नौसिखिये मुख्य साजिशकर्ताओं की फरारी की कहानी किसी पेशेवर अपराधियों से कम नहीं है। 25 दिन की फरारी उन्होंने सात राज्यों, 20 शहरों में घूमकर कुल 4069 किमी का सफर तय किया। इस दौरान तकनीक का प्रयोग करते हुए पुलिस को छकाने का प्रयास किया। मगर पुलिस ने उनकी चाल पर हाथ रख यह समझ लिया कि अपने कुछ खास लोगों को ये फोन कर रहे हैं। बस इसी चाल के जरिये दोनों पुलिस के बुने जाल में फंस गए और धर लिए गए।
इस तरह काटी फरारी
27 दिसंबर की रात घटना के बाद तीनों शूटरों को लेकर अंकुश व साहिल अलीगढ़ से पनेठी होकर एटा, शिकोहाबाद, आगरा के रास्ते मथुरा पहुंचे। जहां रिफाइनरी पर तीनों शूटरों को उतारा। इसके बाद तीनों नोएडा में दुष्यंत के भाई के पास पहुंचे। जहां उत्कर्ष भी पहुंच गया। वहां उन्होंने फारच्युनर छोड़ दी और दूसरी गाड़ी लेकर दिल्ली गए। जहां अंकुश की गर्लफ्रेंड के घर से कपड़ों का बैग लेकर तीनों सोनीपत गए। वहां एक होटल में कुछ घंटे रुकने के बाद करनाल गए। करनाल के एटीएम से रुपये निकाले। इसके बाद अंबाला में कुछ देर रुके और वहां से सोलन पहुंचे। वहां पुलिस के पहुंचने की खबर पर देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार पहुंचे। तीनों जगह पुलिस के आने की खबर पर वहां से लखनऊ पहुंचे। यहां एक दिन रुकने के बाद उत्कर्ष इनसे स्कार्पियो लेकर अलग हो गया और अंकुश व साहिल ट्रक में लिफ्ट लेकर हमीरपुर पहुंचे। जहां कुछ घंटे एक चाय की दुकान पर रुकने के बाद झांसी पहुंचे। झांसी से बस से जयपुर पहुंचे। यहां करीब 12 दिन होटल में रुकने के बाद इंदौर पहुंचे और वहां 4 दिन रुकने के बाद 20/21 को दिल्ली आ गए। दिल्ली से बीती रात अलीगढ़ सरेंडर करने आए और धरे गए।
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घटना के बाद निकाल फेंके थे मोबाइल के सिम
दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि घटना के बाद हम दोनों ने अपने मोबाइल से सिम निकाल फेंके थे। मगर जहां भी रुकते, वहीं वाईफाई की मदद से या तो व्हाट्सएप कॉल या फिर इंटरनेट स्पूफिंग कॉल की मदद से अपने लोगों को फोन करते थे। सुबह का नियमित काम था, अलीगढ़ में अपने कुछ करीबियों को कॉल कर अखबारों में छपी खबर की जानकारी करते या फिर ई-पेपर के जरिये खबरें पढ़ते। जिससे यह पता चलता कि पुलिस कहां दौड़ रही है। यही वजह रही कि वे यहां से हरियाणा और हिमाचल रुकने के प्लान से गए थे। मगर पुलिस के हरियाणा व हिमाचल दौड़ लगाने की खबर से वे लखनऊ के रास्ते राजस्थान व मध्य प्रदेश पहुंचे। खबरों के जरिये जब पता चला कि राजस्थान या एमपी पुलिस नहीं आ रही तो वहां सबसे ज्यादा समय बिताया।
गर्लफ्रेंड ने दी पहली लोकेशन, फिर कॉल से मिली मदद
पुलिस को अंकुश की दिल्ली में रहने वाली गर्लफ्रेंड की जानकारी मिली तो पुलिस की एक टीम वहां पहुंची। इस दौरान पता चला कि यहां से हिमाचल जाने की कहकर निकला है। इस पर पुलिस हिमाचल पहुंची। उस दौरान उत्कर्ष ने अपना मोबाइल शुरू कर लिया तो उसकी लोकेशन मिल गई। मगर वे वहां से पुलिस के आने से पहले निकल गए। इसके बाद पुलिस ने उनका हरिद्वार तक पीछा किया। फिर खबर नहीं मिली। लखनऊ में फिर उत्कर्ष ने दोनों को अपने परिचित के होटल में इन्हें ठहराया और खुद शराब के नशे में अपने दोस्तों से मिलने गया। तब उसने मोबाइल खोला। इस बार फिर पुलिस को लोकेशन मिली। मगर वहां से दोनों निकल गए और उत्कर्ष ही पुलिस के हाथ लगा।
इंटरनेट नंबरों पर काम शुरू तो मिल गई सफलता
उत्कर्ष के जरिये उनके द्वारा व्हाट्सएप व इंटरनेट स्पूफिंग नंबर कॉलिंग की जानकारी मिली। इस पर पुलिस ने कुछ ऐसे नंबर रडार पर लिए, जिन्हें वे कॉल कर रहे थे। बस इसी जरिये सफलता मिलती चली गई। साथ में अंकुश द्वारा करनाल, जयपुर, इंदौर में क्रेडिट कार्ड से एटीएम से रुपये निकले तो वहां से भी लोकेशन मिली। मगर इसी बीच बातचीत में पता चला कि यह सरेंडर करने आ रहे हैं तो पुलिस ने भागना छोड़ आने का इंतजार शुरू किया और सफलता मिल गई।
उत्कर्ष को बताया, साहिल ने मना किया, फिर भी ऑडियो वायरल
अंकुश ऑडियो वायरल करने वाला है और कुछ लोगों के मत्थे आरोप मढ़ेगा। यह जानकारी खुद उत्कर्ष ने पुलिस को देते हुए अंकुश की एक कॉल भी सुनाई। साथ में साहिल ने मना भी किया था कि इसमें तू खुद फंस जाएगा। फिर भी उसने ऑडियो वायरल किया। फेसबुक से पुलिस को पता लगा कि यह दिल्ली से वायरल हुआ है। इस पर पुलिस की एक टीम दिल्ली भी पहुंच गई।
गलफ्रेंड ने पुलिस को काफी घुमाया
दिल्ली की रहने वाली गर्लफ्रेंड अपनी मां के साथ रहती है। उससे पिछले करीब छह माह से अंकुश की दोस्ती है। उसे हत्या के बाद भागते समय कपड़ों का बैग तैयार करके रखने के निर्देश थे। जब पुलिस वहां पहुंची तो उसने पुलिस को काफी घुमाया।
सीसीटीवी के सुरागों पर तोते की तरह बोला
इस घटना के बाद जब फरारी हुई तो अंकुश व दुष्यंत की मुलाकात नहीं हुई है। न फोन पर बातचीत हुई। पुलिस पूछताछ में जब सीसीटीवी साक्ष्य दिखाते हुए पुलिस ने उससे क्रास बातचीत की तो वह एक-एक कर सभी तथ्य उजागर करता चला गया। उसने बताया कि किस तरह एटा चुंगी से पीछा करते समय उसने दुष्यंत के गैराज पर गाड़ी बदली। किस तरह हरदुआगंज पनैठी रोड पर पुलिस को चकमा देकर शूटरों को ले गया। किस तरह किसी अन्य को बदनाम करने के लिए फेसबुक पर ऑडियो वायरल किया।
कचहरी में होशियार हत्याकांड
को अंजाम दे हिलाया था जिला
बन्नादेवी से गैंगेस्टर, जिले का टॉप-10 प्रवीण बाजौता रह चुका है जिला बदर
टप्पल के बाजौता का प्रवीण चौधरी अक्सर जिले में जरायम को लेकर सुर्खियों में रहा है। 2020 में जिले के टॉप-10 अपराधी घोषित प्रवीण पर सिविल लाइंस में हत्या, टप्पल में लूट, दिल्ली स्पेशल सेल में हथियार तस्करी, गुरुग्राम में लूट, बन्नादेवी में फायरिंग व आर्म्स एक्ट सहित कई मुकदमे दर्ज हैं। साथ में वह बन्नादेवी से गैंगेस्टर व जिला बदर रह चुका है। इस बार के पंचायत चुनाव में उसने जिला पंचायत तक लड़ने की तैयारी की थी। मगर जिला बदर होने के कारण पीछे हटना पड़ा।
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अवैध हथियारों की तस्करी को लेकर रडार पर रहने वाले प्रवीण ने अपने चाचा की हत्या के बदले पुलिस अभिरक्षा में जेल से दीवानी पेशी पर आए गांव के ही होशियार सिंह की हत्या कर जिला हिला दिया था। हालांकि, बाद में दोनों पक्षों में समझौते के चलते उस मुकदमे में बरी हो गए। इसके बाद अक्सर दिल्ली पुलिस की तलाश, हरियाणा पुलिस की खोज में उसका नाम सामने आया। अब इस घटना के बाद फिर प्रवीण सुर्खियों में है। बन्नादेवी में एक प्लाट पर कब्जे के विवाद में फायरिंग व हथियार बरामदगी में उसका नाम आया था। जिसमें गैंगेस्टर की कार्रवाई हुई थी। अब संदीप की हत्या में उसके दो साथी कौन थे, उनके नाम प्रवीण ही बताएगा।
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