समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि संभल में सरकार और प्रशासन ने मिलकर झगड़ा कराया है। देश-प्रदेश में भाजपा शांति नहीं चाहती है, जबकि सपा शांति खुशहाली और समृद्धि के पक्ष में है। सपा के पूर्व विधायक जफर आलम के आवास पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि संभल में जब एक बार जामा मस्जिद का सर्वे हो गया है, तो इतनी जल्दी दूसरी बार सर्वे की क्या जरूरत थी। जब दूसरी बार सर्वे की टीम गई, तो उसमें भाजपाई शामिल थे। इसका सीधा मतलब है कि संभल में सरकार और प्रशासन ने मिलकर झगड़ा कराया और उसे नफरत की आग में झोंका गया है।
उन्होंने कहा कि 15 सदस्यीय सपा प्रतिनिधि मंडल संभल में पीड़ितों से मिलने के लिए जा रहा था, लेकिन प्रशासन ने उसे मुरादाबाद के मुंडापांडे पर रोक दिया गया, जबकि मुरादाबाद की सांसद रुचिवीरा को उनके आवास से बाहर निकलने नहीं दिया। यह सब क्या है? आखिर कब तक लोगों और पार्टी प्रतिनिधिमंडल को पीड़ितों से मिलने से रोका जाएगा। एक न एक दिन उनसे भेंट हो ही जाएगी। अगर इतनी तेजी सर्वे के दौरान उपजे विवाद से पहले प्रशासन दिखाई होती, तो पांच लोग नहीं मारे जाते। संभल के हालात नहीं बिगड़ते। स्कूल-कॉलेज बंद नहीं होते। कारोबार-व्यापार चौपट नहीं होता, लेकिन इससे भाजपा सरकार को कोई सरोकार नहीं है। अखिलेश ने कहा कि जिस तरह लखनऊ में एक हादसे के बाद प्रशासन ने टिन लगवा दिए थे, उसी तरह संभल में टिन लगाने की कवायद की जा रही है।