यादराम का नाबालिग बेटा कुलदीप कुछ समय पूर्व लापता हो गया था। पुलिस ने जनवरी 2019 में उसे मौसी के कब्जे से बरामद किया था। तभी से कुलदीप संत फिदेलिस स्थित अनाथ आश्रम सवियो नवजीवन बाल भवन में है। परंतु बड़ा बेटा राहुल व बेटी मंजू भी अपने घर से गायब हैं। पता चला है कि वे अपनी बुआ के पास रह रहे हैं।
मानसिक रूप से दिव्यांग है राहुल
यादराम का बड़ा बेटा राहुल मानसिक रूप से थोड़ा दिव्यांग है। उसे नशे की लत भी भूमाफिया ने अपने फायदे के लिए लगवाई है। उसके दो मेडिकल हुए। इसमें उसकी उम्र 19 वर्ष तो दूसरे में 18 वर्ष दर्शायी गई है। बताया जाता है कि राहुल की उम्र सेटिंग से 18 वर्ष कागजों में करवाने के पीछे भूमाफिया की चाल यह थी कि उसे बालिग दर्शाकर उसके माध्यम से उसकी बेशकीमती जमीन पर कब्जा कर लिया जाय।
आगरा या कानपुर संरक्षण केंद्र भेजी जा सकती है मंजू
जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नीरा वार्ष्णेय ने बताया कि जान के खतरे को देखते हुए यादराम की नाबालिग पुत्री मंजू को बालिकाओं के आगरा अथवा कानपुर स्थित संरक्षण गृह भेजने की कोशिश की जा रही है। उसके शुभचिंतक उसे संरक्षण गृह भेजने की वकालत कर रहे हैं।
यादराम के तीनों अनाथ बच्चों के जान माल की सुरक्षा के लिए तहसीलदार कोल को शुक्रवार को उनका पक्ष सुनकर संरक्षक तय करने के आदेश दिये गए हैं। इस मामले में जिला बाल संरक्षण समिति की अध्यक्ष नीरा वार्ष्णेय एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी स्मिता सिंह के विभाग का एक प्रतिनिधि पीड़ित पक्ष के साथ तहसीलदार से मिलेंगे।
- चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी
राकेश यादव हत्याकांड में नामजद विंका प्रधान उर्फ रवि प्रताप सिंह के बीच जमीन के विवाद की एक और वजह सामने आई है, जिसमें राकेश यादव ने तत्कालीन सपा सरकार के बल पर साधू आश्रम में सड़क किनारे की जमीन पर कब्जा लेते हुए उसकी बाउंड्री करा दी थी। बताया जाता है कि सड़क किनारे की इस जमीन के कुछ हिस्से का विंका प्रधान ने बैनामा करा लिया था, जबकि उसी जमीन के दूसरे खातेदार से राकेश यादव ने बैनामा करा लिया।
मगर बात जब जमीन पर काबिज की आई तो दोनों ही सड़क किनारे की जमीन पर काबिज होने का दावा करने लगे। विंका के गढ़ में उसके भारी विरोध के बावजूद राकेश ने पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाकर सड़क किनारे की जमीन पर बाउंड्री करा दी जोकि आज तक मौजूद है। बताया जा रहा है कि राकेश यादव को विंका प्रधान के धुर विरोधी ही सामने लेकर आए, जिसके बाद दोनों के संबंधों में खटास आ गई। हालांकि विंका प्रधान पक्ष का कहना है कि राकेश यादव के जीते जी विरोधियों ने उनका इस्तेमाल आपसी रंजिश को भुनाने के लिए किया और राकेश की मौत के बाद उसकी हत्या में विंका का नाम घसीटना भी विरोधियों की ही चाल है।
शूटरों की तलाश में मारे जा रहे हाथ पैर, घरों पर ताले
राकेश यादव हत्याकांड में पुलिस ने तहरीर के आधार पर छह के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज कर लिया है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। वहीं सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने कस्बे के ही कई लोगों को पूछताछ के लिये उठाया है, लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग सका है। मृतक के मोबाइल की सीडीआर तथा आरोपियों की लोकेशन पर भी पुलिस काम कर रही है, लेकिन गुरुवार शाम तक पुलिस के हाथ कुछ लग नहीं सका। वहीं शूटरों की तलाश में लगातार दबिश जारी हैं। नामजदों के घरों पर ताले हैं। थाना प्रभारी संदीप कुमार ने बताया कि पुलिस की दो टीमें अलग अलग बिंदुओं पर काम कर रही हैं जल्द ही आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।