लाखों कीमत की चीनी को बंदरों द्वारा चट कर जाने के प्रकरण में अलीगढ़ से लखनऊ तक खलबली मचा दी है। प्रदेश की सहकारी चीनी मिल के एमडी रमाकांत पांडेय ने इस पूरे प्रकरण को लेकर डीएम व साथा चीनी मिल के जीएम से वार्ता की है । जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। उधर, मिल के गोदाम का स्टॉक दुरूस्त करने में बुद्ध पूर्णिमा के अवकाश के दिन भी स्टाफ जुटा रहा। खास बात है कि सहकारी साथा चीनी मिल के पदेन सभापति डीएम होते हैं। हैरत की बात है कि साथा चीनी मिल के जीएम समेत अन्य स्टाफ ने मिल के बंद होने के बाद से यहां के स्टॉक व अन्य मामलों की जानकारी प्रशासन को नहीं दी है।
शीरा में अनियमितताएं होने की आशंका, डीएम कराएंगे जांच
साथा चीनी मिल में चीनी गायब होने के साथ ही शीरा के रखरखाव में भी लापरवाही एवं बड़ी अनियमितताएं होने की आशंका है। चर्चा है कि मिल में स्टॉक के अनुसार शीरा उपलब्ध नहीं हैं। डीएम विशाख जी ने इस प्रकरण में शीरा की अलग से जांच कराने का भी निर्णय लिया है। डीएम ने आबकारी विभाग के अफसरों को इसकी जांच का जिम्मा सौंपा है।
करीब 26 महीने से बंद है साथा चीनी मिल
अलीगढ़ जिले की एकमात्र साथा चीनी मिल पिछले करीब 26 महीने से बंद है। चीनी मिल को फिर से खड़ा करने के नाम पर करोड़ों रुपये पूर्व में ही खर्च हो चुके हैं। गन्ना किसान इस बार भी पेराई के लिए दूसरी चीनी मिलों पर निर्भर हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साथा चीनी मिल का नए सिरे से निर्माण कराने की घोषणा कर चुके हैं। मिल के लिए प्रशासनिक स्तर से नए सिरे से प्रस्ताव तैयार कराकर डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) भेजी जा चुकी है। बस शासन स्तर से मंजूरी की घोषणा का इंतजार है।चीनी मिल निर्माण के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की दरकार है, लेकिन अभी तक बजट जारी न होने से चीनी मिल बंद पड़ी हुई है। मिल की मरम्मत पर पिछले पांच साल में ही 5.70 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
अलीगढ़ में गन्ने का रकवा निरंतर घट रहा है। 17 वर्षों में गन्ने का रकबा पहले की तुलना में मात्र 25 फीसदी ही रह गया है। चीनी मिल के लंबे समय तक बंद होने से जिले के गन्ना किसानों का मोह गन्ना की खेती से हट रहा है। वर्ष 2015 में गन्ने का रकवा 10,735 हेक्टेयर था जो तीन साल बाद घटकर 7,500 हेक्टेयर ही गया। वर्ष 2019 में 6,100 हेक्टेयर, 2020 में 5,000 हेक्टेयर, 2021 में 4,700 हेक्टेयर रकवा ही रह गया। इस साल यह रकवा 4000 हेक्टेयर तक जा सिमटा है। रकवा घटने से गन्ने का उत्पादन भी कम हो रहा है। साथा चीनी मिल के ठप रहने के चलते पिछले पांच साल से जनपद में उत्पादित गन्ना साबितगढ़, कासगंज समेत अन्य चीनी मिलों के लिए भेजा जा रहा है।
ऑडिट टीम ने गेस्ट हाउस में बैठकर ही हवा-हवाई जांच कर ली है। जितनी चीनी कम बताई जा रही है, उतनी मात्रा में चीनी कम नहीं है। मिल के अंदर बने गोदाम के शटर टूटे हुए हैं, वहीं छत टूटी हुई है। छत में होकर पानी अंदर आ जाता है। बंदरों द्वारा करीब 538 क्विंटल चीनी को खा लिया गया है। इससे चीनी कम हुई है। ऑडिट टीम द्वारा जो 1100 क्विंटल चीनी कम बताई जा रही है, वह गलत है। बीते चार वर्षों में मिल की मरम्मत एवं रख-रखाव के लिए कोई भी बजट या भत्ता नहीं मिला है। इसके लिए कई बार शासन को पत्र भेजा जा चुका है। - गुलाब सिंह, स्टोर कीपर, साथा चीनी मिल
मिल परिसर में बंदरों उत्पाद मचाते हैं। वर्ष 2020-21 से चीनी का उत्पादन नहीं हो रहा है। मिल की लंबे समय से मरम्मत भी नहीं हुई है। चीनी कैसे कम हुई हमें कुछ भी नहीं पता ? - महादेव बक्शी एवं जालिम सिंह, चीनी मिल कर्मचारी
चीनी मिल से 1137 क्विंटल चीनी गायब हो जाने के प्रकरण में एमडी के स्तर से जांच कमेटी गठित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।-राहुल यादव, जीएम, साथा चीनी मिल
साथा चीनी मिल तीन साल से बंद है। मिल से चीनी गायब होने के प्रकरण में एमडी के स्तर से प्रशासनिक जांच के लिए निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए एक टीम गठित की जा रही है। जो मिल बंद होने के समय स्टॉक आदि की जांच करने के साथ ही पूरी हकीकत का पता लगाकर अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसके आधार पर ही कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। - विशाख जी, जिलाधिकारी