जिस दिन से सरकार और सिस्टम का फोकस गांव की तरफ हुआ है। उस दिन से गांवों में कोरोना संक्रमण के प्रसार में कमी होना तो दिख रहा है। मगर तस्वीर अभी भी बेहद खराब है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने जिले की बिजौली और इगलास सीएचसी से लाभान्वित होने वाले गांवों में फैल रही बीमारियों की जानकारी जुटाई तो पाया कि डर कम नहीं हो रहा।
समय पर इलाज और दवा नहीं मिल रही। मौत की खबर तो हाहाकार मचा देती है। निमोनिया और मलेरिया जैसी बीमारियों के बीच कोरोना का खौफ लोगों को लगातार दहशत का माहौल दे रहा है। बात स्वास्थ्य सेवाओं की करें तो आशाओं द्वारा बांटी जा रही दवाओं किट के बाद कोई देखने तक नहीं आता। फिर झोलाछाप या नीम-हकीम से ही इलाज मयस्सर हो रहा है। दोनों क्षेत्रों में करीब एक-एक दर्जन गांवों तो ऐसे हैं, जहां आज भी बिस्तर पड़े हैं। पेश है विस्तृत रिपोर्ट...
इगलास क्षेत्र का हाल
सीएचसी इगलास से छोटे-बडे़ करीब 80 गांव लाभान्वित होते हैं। इसके अधीन गोरई पीएचसी और तोछीगढ़ व ताहरपुर आयुर्वेद केंद्र संचालित हैं। मगर इन दिनों कोविड टीकाकरण के कारण सभी जगह ओपीडी सेवाएं बंद हैं या फिर स्टाफ गांव-गांव कांटेक्ट टेसिंग और किट वितरण आदि में जुटा हुआ है।
चुनाव के बाद वैसे तो बीमारी ज्यादातर गांवों में फैली, मगर महतापुर, माकरौल, बिशनपुर, करथला, महुआ, कजरौठ, तोछीगढ़ सहित दस गांव ऐसे हैं, जहां सर्वाधिक कोरोना का प्रसार फैला और अन्य बीमारियां भी लगातार पांव पसार रही हैं। अब तक सौ से अधिक लोग इस क्षेत्र में सरकारी आंकड़ों के अनुसार संक्रमित पाए गए।
आज भी इन गांवों में लोग बीमार हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो कांटेक्ट ट्रेसिंग के जरिये मिलने वाले बीमार या फिर लक्षण के आधार पर मिलने वाले बीमारों को दवा की किट देकर छुटकारा पा लिया जा रहा है। इसके बाद मरीज निजी व्यवस्था से इलाज पा रहा है।
अब वह झोलाछाप से मिले या फिर निजी डॉक्टर से। इसी तरह संक्रमित मरीजों की मानें तो उन्हें स्टेट व सेंट्रल हेल्पलाइन से फीडबैक जानने के लिए फोन तो आ जाते हैं। मगर इलाज या दवा के नाम पर कोई पूछने नहीं आता।
दो दर्जन मौतों ने फैला रखी दहशत
इलाके के सर्वाधिक प्रभावित इन गांवों में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार कोविड से चार लोगों की मौत हुई है, जबकि दो दर्जन मौतें संदिग्ध अवस्था में हुई हैं। इसके बाद से इन गांवों में दहशत का माहौल है। डर में लोग खुद के बेहतर इलाज के लिए हर संभव बेहतर व्यवस्था का प्रयास कर रहे हैं।
सफेद हाथी बेसवां सीएचसी, आशाओं के पास नहीं ग्लब्स व मास्क
इस क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर बेसवां में नई सीएचसी बनकर तैयार हो गई है। मगर वह सफेद हाथी है। इसी तरह किट वितरण कर रही आशा कार्यकर्ताओं और वैक्सीनेशन कर रहे स्टाफ के पास ग्लब्स व मास्क तक नहीं हैं।
हाल-ए-बिजौली
85 गांवों को लाभान्वित करने वाली बिजौली सीएचसी के अधीन पालीमुकीमपुर, हरदोई, हरनौठ, दादों में पीएचसी हैं। मगर इस क्षेत्र में भी न जांच न दवा वाला आलम है। क्षेत्र के हारुनपुर कला, गोबरा, गिरधरपुर, दताचौली खुर्द, बिजौली, सिरसा, बूलापुर, सिंघपुर हिम्मतपुर, भमोरी खुर्द आदि गांवों में बीमारियां लगातार पांव पसार रही हैं।
चुनाव के बाद लोग बुखार, निमोनिया, मलेरिया से बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इस क्षेत्र के बिजौली, पालीमुकीमपुर, दादों, हरदोई कस्बों में डॉक्टर, झोलाछापों और नीम हकीमों के यहां मरीजों की भीड़ मौजूदा हालात की गवाही देती है। गांव-गांव झोलाछाप इलाज दे रहे हैं।
क्षेत्र में लोग यह भी सवाल खड़ा कर रहे हैं कि आशा कार्यकर्ता कहां किट वितरित कर रही हैं, समझ में नहीं आ रहा। कुछ गांवों में जरूर किट वितरण होते देखा जाता है। कुल मिलाकर लोग बीमार होने के बाद रामभरोसे इलाज पा रहे हैं। न बेहतर तरीके से दवा मिल पा रही है और न इलाज मिल पा रहा है।
इन गांवों में हुईं सर्वाधिक मौत
पंचायत चुनाव के बाद बिजौली में अब तक 20, हारुनपुर कला में 10, गोबरा व गिरधरपुर में 10, सिरसा में 8, बूलापुर 4, सिंघपुर हिम्मतपुर में 4, जिला पंचायत प्रत्याशी के भाई की भमोरी खुर्द में मौत हुई है, जबकि हारुनपुर कला से 4 लोग आज भी बाहर निजी अस्पतालों में गंभीर हालत में भरती हैं।
खलती है जिला मुख्यालय से दूरी
इस क्षेत्र में वैसे तो गांव-गांव झोलाछाप, कस्बों में कुछ डॉक्टर हैं। मगर इस क्षेत्र के सांकरा, दादों, हरदोई, बिजौली की दूरी जिला मुख्यालय से काफी है। ऐसे में गंभीर मरीजों को जिला मुख्यालय के निजी डॉक्टरों तक लाने में काफी खल जाती है। इसलिए यहां कुछ बेहतर संसाधन होना बेहद जरूरी है।
ये है तस्वीर
-10 गांवों में इगलास क्षेत्र में सबसे ज्यादा फैल रहा बीमारी का प्रसार
-25 से करीब मौत इन गांवों में हुईं हैं, जिनमें 4 कोविड से कन्फर्म
-150 से ज्यादा झोलाछापों के सहारे हैं इस क्षेत्र के 80 गांवों के लोग
-15 गांवों में बिजौली क्षेत्र में बीमारी से लोग हुए सर्वाधिक प्रभावित
-56 करीब मौत इससे जुड़े गांवों में अब तक विभिन्न कारणों से हुई
-200 करीब झोलाछाप क्षेत्र में चारों ओर सक्रिय होकर दे रहे हैं दवा